{"_id":"5f133ed78ebc3e63b77a01ed","slug":"prayagraj-a-holy-dip-in-the-confluence-of-shani-pradosh","type":"story","status":"publish","title_hn":"शनि प्रदोष पर संगम में लगी पुण्य की डुबकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शनि प्रदोष पर संगम में लगी पुण्य की डुबकी
Sun, 19 Jul 2020 12:16 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 19 Jul 2020 12:16 AM IST
विज्ञापन
prayagraj news: बुधवार को संगम में देव प्रभाकर शास्त्री दद्दा जी की अस्थियां संगम में विसर्जित की गई।
- फोटो : prayagraj
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोविड-19 केसंक्रमण की परवाह किए बिना शनिवार को सावन के शनि प्रदोष पर श्रद्धालुओं ने संगम में पुण्य की डुबकी लगाई। सुबह से ही संगम समेत अन्य गंगा तटों श्रद्धालु स्नान के साथ ही पूजा और ध्यान में रमे रहे। घरों में शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर सविधि आराधना की जाती रही। पुरोहितों ने शनि की अंदरदशा,महादशा, ढैया के साथ ही कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए भी आराधना की। महिलाओं ने दीप जलाए और गरीबों को अन्न-वस्त्र का दान किया।
शनि प्रदोष के दुर्लभ संयोग में भोर से ही श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे। हालांकि दोपहर बाद बैरिकेडिंग की वजह से तमाम लोगों को वापस भी होना पड़ा। पुलिस ने लोगों रोकने के लिए त्रिवेणी मार्ग पर बैरिकेडिंग करा दी थी। लेकिन, आस्थावान बड़े हनुमान मंदिर वाले मार्ग से होकर संगम पहुंच रहे थे।
सुरम्य लहरों के बीच संगम की रेती पर एक ओर डुबकी लग रही थी, तो दूसरी तरफ लोग पत्नी व बच्चों के सात रेती पर शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर फूलमाला अर्पित कर रहे थे। कोई अर्घ्य दे रहा था तो कोई दीपदान कर रहा था। पुरोहितों की चौकियों पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए संकल्प दिलाए जा रहे थे ।
विज्ञापन
घरों और मंदिरों में शनि ग्रह की शांति और काल सर्प दोष निवारण के लिए भी हवन पूजन होता रहा। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर भी व्रतियों ने शनि प्रदोष पर स्नान किया और पुरोहितों की चौकियों पर अभिषेक और पूजा, आरती की। शनि प्रदोष पर भरद्वाजेश्वर महादेव, सोमेश्वर महादेव, पंडिा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। सोमेश्वर महादेव में शनि की अंतरदशा और काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजन-हवन कराया जा रहा था। मंदिर के पुजारी राजेंद्र पुरी ने बताया कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अनुष्ठान कराए गए।
इनसेट
चार दिवसीय शिव और रूद्र पूजन आरंभ
शनि प्रदोष के साथ ही चार दिवसीय शिव और रुद्र पूजन शनिवार को आरंभ हो गया। शनि प्रदोष के बाद रविवार को श्रावण की मास शिवरात्रि होगी। 20 तारीख यानी सोमवार को सोमवती अमावस्या और मंगलवार को महाचंडिका पूजन,मंगला गौरी व्रत एवं हनुमत पूजन का संयोग है। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस चार दिवसीय शिव आराधना के संयोग में प्रत्येक सनातनधर्मी को ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। अगर हो सके तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप का सुबह -शाम पाठ करें। साथ ही अपने परिवार के सदस्यों के साथ कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें।
विज्ञापन
शनि प्रदोष के दुर्लभ संयोग में भोर से ही श्रद्धालु संगम तट पर पहुंचने लगे। हालांकि दोपहर बाद बैरिकेडिंग की वजह से तमाम लोगों को वापस भी होना पड़ा। पुलिस ने लोगों रोकने के लिए त्रिवेणी मार्ग पर बैरिकेडिंग करा दी थी। लेकिन, आस्थावान बड़े हनुमान मंदिर वाले मार्ग से होकर संगम पहुंच रहे थे।
विज्ञापन
सुरम्य लहरों के बीच संगम की रेती पर एक ओर डुबकी लग रही थी, तो दूसरी तरफ लोग पत्नी व बच्चों के सात रेती पर शिव-पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर फूलमाला अर्पित कर रहे थे। कोई अर्घ्य दे रहा था तो कोई दीपदान कर रहा था। पुरोहितों की चौकियों पर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए संकल्प दिलाए जा रहे थे ।
विज्ञापन
घरों और मंदिरों में शनि ग्रह की शांति और काल सर्प दोष निवारण के लिए भी हवन पूजन होता रहा। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर भी व्रतियों ने शनि प्रदोष पर स्नान किया और पुरोहितों की चौकियों पर अभिषेक और पूजा, आरती की। शनि प्रदोष पर भरद्वाजेश्वर महादेव, सोमेश्वर महादेव, पंडिा महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। सोमेश्वर महादेव में शनि की अंतरदशा और काल सर्प दोष निवारण के लिए पूजन-हवन कराया जा रहा था। मंदिर के पुजारी राजेंद्र पुरी ने बताया कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुए अनुष्ठान कराए गए।
इनसेट
चार दिवसीय शिव और रूद्र पूजन आरंभ
शनि प्रदोष के साथ ही चार दिवसीय शिव और रुद्र पूजन शनिवार को आरंभ हो गया। शनि प्रदोष के बाद रविवार को श्रावण की मास शिवरात्रि होगी। 20 तारीख यानी सोमवार को सोमवती अमावस्या और मंगलवार को महाचंडिका पूजन,मंगला गौरी व्रत एवं हनुमत पूजन का संयोग है। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस चार दिवसीय शिव आराधना के संयोग में प्रत्येक सनातनधर्मी को ऊं नम: शिवाय का जाप करना चाहिए। अगर हो सके तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप का सुबह -शाम पाठ करें। साथ ही अपने परिवार के सदस्यों के साथ कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें।