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प्रयाग का नाम बदलना भी है सांस्कृतिक आतंकवाद: देवकी नंदन ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Dec 2016 01:55 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : allahabad
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श्रीराधे-राधे सेवा समिति की ओर से मीरापुर स्थित डीएवी कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन रविवार को प्रख्यात कथाव्यास देवकी नंदन ठाकुर ने कहा प्रयाग का नाम बदलना भी सांस्कृतिक आतंकवाद है। विदेशियों ने हमारे धर्म ग्रंथों को नष्ट किया। संस्कृतियों, मान्यताओं को खत्म किया और तीर्थ स्थलों को तोड़ा गया है। पवित्र स्थलों के इतिहास को दबाने के लिए नाम बदले गए। उन्होंने कथा स्थल से इलाहाबाद का नाम बदलने के लिए हस्ताक्षर अभियान की शुरूआत करने की बात कही ।
कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि प्रयाग तीर्थराज है। सनातन मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना से यही पर यज्ञ किया। वाल्मीकि रामायण में उल्लिखित है कि संगम के जल से प्राचीन राजाओं का अभिषेक होता था। वन जाते समय श्रीरामचंद्र प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे। जो संस्कृतियां अपनी मान्यताओं को भूल जाती है एक दिन वो समाप्त हो जाती है।
इलाहाबाद को एक बार फिर से प्रयाग नाम दिलाने के लिए प्रशासन को पत्र दिया जाएगा। जिसमें सभी को हस्ताक्षर कर समर्थन देने का आह्वान किया। प्रह्लाद चरित और गज ग्राह प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान भक्त वत्सल हैं और सच्चे हृदय से स्मरण करने पर मदद को स्वयं आते हैं। जयकारों से कथा स्थल गूंजता रहा। इस अवसर पर कुलदीप सिंह,अंतरिक्ष शुक्ला, प्रमोद पुरवार, प्रेम केसरवानी, प्रमोद अरोड़ा, अनिल जैन, प्रकाश डालमिया, पवन तिवारी, विजय केसरवानी, विजय अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।
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कथा क्रम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि प्रयाग तीर्थराज है। सनातन मान्यताओं के मुताबिक ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना से यही पर यज्ञ किया। वाल्मीकि रामायण में उल्लिखित है कि संगम के जल से प्राचीन राजाओं का अभिषेक होता था। वन जाते समय श्रीरामचंद्र प्रयाग में भारद्वाज ऋषि के आश्रम पर होते हुए गए थे। जो संस्कृतियां अपनी मान्यताओं को भूल जाती है एक दिन वो समाप्त हो जाती है।
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इलाहाबाद को एक बार फिर से प्रयाग नाम दिलाने के लिए प्रशासन को पत्र दिया जाएगा। जिसमें सभी को हस्ताक्षर कर समर्थन देने का आह्वान किया। प्रह्लाद चरित और गज ग्राह प्रसंग की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान भक्त वत्सल हैं और सच्चे हृदय से स्मरण करने पर मदद को स्वयं आते हैं। जयकारों से कथा स्थल गूंजता रहा। इस अवसर पर कुलदीप सिंह,अंतरिक्ष शुक्ला, प्रमोद पुरवार, प्रेम केसरवानी, प्रमोद अरोड़ा, अनिल जैन, प्रकाश डालमिया, पवन तिवारी, विजय केसरवानी, विजय अरोड़ा आदि उपस्थित रहे।
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