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Prayagraj News: रामभक्ति के बल पर हनुमान ने जलाई सोने की लंका
Mon, 19 Oct 2026 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 19 Oct 2026 02:31 AM IST
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मांडा के महेवा में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
प्रभु श्रीराम का संदेश लेकर लंका पहुंचे हनुमान ने जब माता सीता को मुद्रिका सौंपी तो भक्ति और विश्वास का भाव साकार हो उठा। इसके बाद अशोक वाटिका उजाड़ने, अक्षय कुमार वध और रावण के दरबार में निर्भीकता के प्रसंगों के बीच लंका दहन की लीला ने दर्शकों को रोमांचित किया। शनिवार रात महेवा कला गांव की 111वें वर्ष की रामलीला में कलाकारों ने इन दृश्यों का प्रभावी मंचन किया। नहवाई गांव में भी लंका दहन की लीला प्रस्तुत की गई।
महेवा कला में शबरी मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध के बाद सीता की खोज का प्रसंग आगे बढ़ा। सुरसा की परीक्षा पार कर हनुमान लंका पहुंचे, जहां लंकिनी से सामना हुआ। विभीषण से भेंट के बाद अशोक वाटिका में माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका दी।
मेघनाद ने उन्हें ब्रह्मपाश में बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। पूंछ में आग लगाने का आदेश रावण पर ही भारी पड़ा और हनुमान ने लंका दहन कर दिया। मंचन ने भक्ति, विवेक और अहंकार के संघर्ष को जीवंत किया।
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महेवा कला में राम बने सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण करन शर्मा, सीता अंकित शर्मा, अंगद गुलाब पांडेय, जामवंत मानस मिश्र, रावण अश्वनी श्रीवास्तव, संपाती दिनेश पांडेय, सुग्रीव सोनू, बाली सार्थक श्रीवास्तव और मेघनाद अविनाश शर्मा ने अभिनय किया।
नहवाई में राम की भूमिका ओम, लक्ष्मण की आयुष, सीता की मुदित, हनुमान की विष्णुशंकर द्विवेदी, सुग्रीव की शिवशंकर, बाली की राजकुमार, अंगद की सत्यप्रकाश और रावण की ज्ञानेंद्र ने निभाई।
रामलीला में हनुमान ने किया लंका दहन, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा पंडाल
महेवा कला गांव में 111वें वर्ष की रामलीला में शनिवार रात कई लीलाओं का मंचन हुआ। इनमें शबरी मिलन, सुग्रीव मित्रता और बाली वध शामिल थे। हनुमान ने सीता की खोज की। रावण के आदेश पर पूंछ में आग लगने पर हनुमान ने सोने की लंका जला दी। राम की भूमिका सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण की करन शर्मा, सीता की अंकित शर्मा, अंगद की गुलाब पांडेय, जामवंत की मानस मिश्र, रावण की अश्वनी श्रीवास्तव, संपाती की दिनेश पांडेय, सुग्रीव की सोनू, बाली की सार्थक श्रीवास्तव और मेघनाद की अविनाश शर्मा ने निभाई।
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महेवा कला में शबरी मिलन, सुग्रीव से मित्रता और बाली वध के बाद सीता की खोज का प्रसंग आगे बढ़ा। सुरसा की परीक्षा पार कर हनुमान लंका पहुंचे, जहां लंकिनी से सामना हुआ। विभीषण से भेंट के बाद अशोक वाटिका में माता सीता को श्रीराम की मुद्रिका दी।
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मेघनाद ने उन्हें ब्रह्मपाश में बांधकर रावण के दरबार में पेश किया। पूंछ में आग लगाने का आदेश रावण पर ही भारी पड़ा और हनुमान ने लंका दहन कर दिया। मंचन ने भक्ति, विवेक और अहंकार के संघर्ष को जीवंत किया।
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महेवा कला में राम बने सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण करन शर्मा, सीता अंकित शर्मा, अंगद गुलाब पांडेय, जामवंत मानस मिश्र, रावण अश्वनी श्रीवास्तव, संपाती दिनेश पांडेय, सुग्रीव सोनू, बाली सार्थक श्रीवास्तव और मेघनाद अविनाश शर्मा ने अभिनय किया।
नहवाई में राम की भूमिका ओम, लक्ष्मण की आयुष, सीता की मुदित, हनुमान की विष्णुशंकर द्विवेदी, सुग्रीव की शिवशंकर, बाली की राजकुमार, अंगद की सत्यप्रकाश और रावण की ज्ञानेंद्र ने निभाई।
रामलीला में हनुमान ने किया लंका दहन, जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजा पंडाल
महेवा कला गांव में 111वें वर्ष की रामलीला में शनिवार रात कई लीलाओं का मंचन हुआ। इनमें शबरी मिलन, सुग्रीव मित्रता और बाली वध शामिल थे। हनुमान ने सीता की खोज की। रावण के आदेश पर पूंछ में आग लगने पर हनुमान ने सोने की लंका जला दी। राम की भूमिका सुंदरम पांडेय, लक्ष्मण की करन शर्मा, सीता की अंकित शर्मा, अंगद की गुलाब पांडेय, जामवंत की मानस मिश्र, रावण की अश्वनी श्रीवास्तव, संपाती की दिनेश पांडेय, सुग्रीव की सोनू, बाली की सार्थक श्रीवास्तव और मेघनाद की अविनाश शर्मा ने निभाई।

मांडा के महेवा में रामलीला का मंचन करते कलाकार। संवाद