प्रतापगढ़ : हिरासत में मौत पर गरमाई सियासत, पीड़ित परिजनों से मिलने से पहले ही सपा के सांसद-विधायक हाउस अरेस्ट
पट्टी थाने के लॉकअप में मोलनापुर निवासी शैलेश गौतम उर्फ अर्जुन नामक युवक की मौत का मामला गरमा गया है। समाजवादी पार्टी ने पीड़ित परिवार से मिलने और उनकी सहायता करने के लिए शनिवार को प्रतिनिधि मंडल भेजने की घोषणा की थी।
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पट्टी थाने के लॉकअप में मोलनापुर निवासी शैलेश गौतम उर्फ अर्जुन नामक युवक की मौत का मामला गरमा गया है। समाजवादी पार्टी ने पीड़ित परिवार से मिलने और उनकी सहायता करने के लिए शनिवार को प्रतिनिधि मंडल भेजने की घोषणा की थी। प्रतिनिधि मंडल में प्रतापगढ़ सांसद एसपी सिंह पटेल, कौशाम्बी सांसद पुष्पेंद्र सरोज, रानीगंज विधायक डॉ. आरके वर्मा, पट्टी विधायक राम सिंह पटेल, विधायक त्रिभुवन दत्त, विधायक तूफानी सरोज, समाजवादी बाबा साहेब अंबेडकर वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मिठाई लाल भारती, जिला महासचिव अब्दुल कादिर जिलानी, पूर्व विधायक नागेंद्र यादव, पूर्व विधायक राजकुमार पाल, विजय यादव व आरके भीम का नाम शामिल था। पुलिस ने रात में ही सांसद एसपी सिंह पटेल को घर पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया।
विधायक आरके वर्मा और विधायक राम सिंह पटेल को भी हाउस अरेस्ट किया गया। इसको लेकर सियासत तेज होने के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार को डाक बंगले में बुलाकर सपा के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात कराई। सपाइयों ने पीड़ित परिवार को एक लाख रुपये की सहायता प्रदान की। साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
रानीगंज विधायक डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि जो मुकदमा कोतवाली पुलिस पर दर्ज होना चाहिए था, वह मुकदमा किशोरी के परिजनों के खिलाफ दर्ज किया गया, जो कि निंदनीय है। पुलिस की लापरवाही से एक परिवार ने अपना बेटा भी खो दिया। इसी तरह पट्टी के सपा विधायक राम सिंह ने कहा कि पट्टी कोतवाली के अंदर जो कृत्य हुआ है, उस मामले के सभी दोषियों का नाम सामने लाया जाए। मृतक अर्जुन और किशोरी का परिजन पीड़ित है। किशोरी के परिजन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किया जाना गलत है।
कोतवाली में हत्या के बाद लटकाया गया था शव : पूर्व मंत्री मोती सिंह
पट्टी कोतवाली में पुलिस हिरासत में हुई मोलनापुर के शैलेश गौतम उर्फ अर्जुन की मौत मामले में भाजपा के पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप उर्फ मोती सिंह ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि पुलिस हिरासत में अर्जुन की हत्या के बाद शव को फंदे पर लटकाया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पूर्व मंत्री का आरोप है कि अर्जुन की मौत के बाद पीड़ित किशोरी के पिता और भाई के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया जाना निंदनीय है। आरोप है कि एफआईआर पर तत्कालीन कोतवाली प्रभारी आनंद पाल सिंह के हस्ताक्षर हैं। उसी मामले में उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। पूर्व मंत्री ने चौकी प्रभारी कमलेश यादव समेत अन्य संबंधित पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी जांच की मांग की है।
पूर्व मंत्री सोशल मीडिया पोस्ट पर दावा किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु के बाद शव को लटकाए जाने की बात अंकित है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस दावे की अंतिम पुष्टि संबंधित पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मूल दस्तावेज से होना बाकी है। पूर्व मंत्री ने एसपी पर भरोसा जताते हुए कहा कि एसपी न्यायप्रिय अधिकारी हैं, उनसे उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कराई जाएगी। कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में घटना से जुड़े कुछ तथ्य आ सकते हैं। जिससे हत्या की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।