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पुलिस आरोपी की जाति पूछेगी...डीजीपी बताएं यह किस कानून में लिखा है: हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Mar 2025 01:41 AM IST
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Police will ask the caste of the accused...DGP should tell in which law this is written: High Court
जात-पात पर आधारित पुलिस विवेचना संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय पर कुठाराघात है। इससे निष्पक्ष विवेचना तो प्रभावित होती ही है, हाशिये पर खड़े समुदायों के प्रति पूर्वाग्रहपूर्ण व्यवहार के जोखिमों की चिंताओं को भी बल मिलता है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
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संवाद न्यूज एजेंसी
प्रयागराज।
किस कानून में लिखा है कि पुलिस आरोपी की जाति पूछेगी? यह सवाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी के डीजीपी से पूछा है। कहा, देश का संविधान जात-पात के भेदभाव को मिटाकर समानता और निष्पक्ष न्याय की बात करता है। सुप्रीम कोर्ट तो जाति-धर्म आधारित दलीलों की भी निंदा करता है। फिर, किस मजबूरी में आरोपियों से उनकी जाति पूछी गई।
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यह तल्ख टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने शराब तस्करी के आरोपी प्रवीण छेत्री की ओर से दाखिल अर्जी पर की। याची ने ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी है।
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कहा है, इटावा के जसवंत नगर थाने की पुलिस ने उसे शराब तस्करी गिरोह का सरगना बताकर यादराम, दीपक कुमार सिंह, लोकेश उर्फ लीला व निशा के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उनसे दो कारों में हरियाणा की 360 बोतल प्रतिबंधित शराब जब्त करने का दावा किया था।
एफआईआर व विवेचना में सभी आरोपियों की जाति लिखी देखकर कोर्ट ने हैरानी जताई। आरोपियों में शामिल दिल्ली निवासी यादराम ने अपनी जाति माली, लोकेश पंजाबी, प्रवीण ने राजपूत, निशा ने ब्राह्मण व बिहार के दीपक ने जाति ठाकुर बताई थी।

आरोपियाें की जाति पूछे जाने पर कोर्ट ने यूपी पुलिस को फटकार लगाई। साथ ही, डीजीपी से 12 मार्च तक व्यक्तिगत हलफनामा तलब कर स्पष्ट करने को कहा कि एफआईआर व जांच में आरोपियों से जाति पूछने की आवश्यकता व प्रासंगिकता किस तरह उचित है।
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