{"_id":"2c530dec62d4301b9352d4000f814ec2","slug":"police-to-stop-the-recruitment-process-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरोगा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दरोगा भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Jan 2015 10:34 PM IST
विज्ञापन
नागरिक पुलिस में सबइंस्पेक्टर और पीएसी प्लाटून कमांडेंट चयन परीक्षा में गंभीर धांधलियों का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में चयन प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है। शनिवार को इस मामले पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार और पुलिस विभाग से जवाब तलब कर लिया है। याचिका में लगाए आरोपों को गंभीरता से लेते हुए अदालत ने 26 जनवरी तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
संजीव कुमार द्विवेदी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में ओएमआर शीट पर व्हाइटनर लगाने की मनाही थी, इसके बावजूद कुछ लोगों ने व्हाइटनर का इस्तेमाल किया। नियमानुसार उनका अभ्यर्थन रद होना चाहिए। आरटीआई में मांगी जानकारी में विभाग ने इसे स्वीकार भी किया है।
इसके बावजूद न सिर्फ व्हाइटनर लगाने वालों की उत्तर पुस्तिकाएं जांच कर परिणाम जारी किए अपितु उसकी आड़ में कुछ और अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में व्हाइटनर लगाकर उनको उत्तीर्ण करा दिया गया। इसी प्रकार से विभाग यह भी नहीं बता रहा है कि मुख्य परीक्षा में कुल कितने अभ्यर्थी सफल घोषित हुए हैं। अभ्यर्थियों को बिना मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किए सीधे ग्रुप डिस्कशन के लिए पत्र भेजा गया। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए सरकार से बिंदुवार जवाब मांगा है। याचिका पर 28 जनवरी को सुनवाई होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
संजीव कुमार द्विवेदी और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे ने पक्ष रखा। याची का कहना है कि दरोगा भर्ती की मुख्य परीक्षा में ओएमआर शीट पर व्हाइटनर लगाने की मनाही थी, इसके बावजूद कुछ लोगों ने व्हाइटनर का इस्तेमाल किया। नियमानुसार उनका अभ्यर्थन रद होना चाहिए। आरटीआई में मांगी जानकारी में विभाग ने इसे स्वीकार भी किया है।
विज्ञापन
इसके बावजूद न सिर्फ व्हाइटनर लगाने वालों की उत्तर पुस्तिकाएं जांच कर परिणाम जारी किए अपितु उसकी आड़ में कुछ और अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में व्हाइटनर लगाकर उनको उत्तीर्ण करा दिया गया। इसी प्रकार से विभाग यह भी नहीं बता रहा है कि मुख्य परीक्षा में कुल कितने अभ्यर्थी सफल घोषित हुए हैं। अभ्यर्थियों को बिना मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित किए सीधे ग्रुप डिस्कशन के लिए पत्र भेजा गया। कोर्ट ने इन आरोपों को गंभीर मानते हुए सरकार से बिंदुवार जवाब मांगा है। याचिका पर 28 जनवरी को सुनवाई होगी।
विज्ञापन