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पुलिस को अभियुक्त के परिवार से दुर्व्यवहार का अधिकार नहीं
Tue, 18 Dec 2018 01:09 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 18 Dec 2018 01:09 AM IST
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Allahabad High Court
- फोटो : PTI
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी के अभियुक्त होने मात्र से पुलिस को उसके परिवार के सदस्यों से दुर्व्यवहार करने का अधिकार नहीं मिल जाता। बिना कोर्ट आदेश के पुलिस को रात में किसी भी समय अभियुक्त के घर पर दबिश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने बरेली के सभासद प्रत्याशी के परिवार वालों को परेशान करने की घटना को गंभीर मानते हुए जिलाधिकारी बरेली को जांच करने का निर्देश दिया है। डीएम को एक माह में व्यक्तिगत हलफनामे के साथ रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। याचिका की सुनवाई सात जनवरी को होगी।
गुल्फसा खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना है कि याची के पति सभासद चुनाव में प्रत्याशी था। उसी समय से पुलिस ने परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया। थाना इज्जतनगर की पुलिस अक्सर रात में याची के घर में घुसकर दुर्व्यवहार करने लगी। 19 मई 2017 को याची के पति को पुलिस नौ बजे रात पकड़कर ले गई। कोई कारण नहीं बताया। इसकी शिकायत डीएम और एसएसपी से की गई। कोई सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट में धारा 156 (3) में अर्जी दी है, जो लंबित है। आरोप है कि नौ जुलाई 18 की रात साढ़े ग्यारह बजे उपनिरीक्षक सुनील राठी, उपनिरीक्षक लाला राम, कांस्टेबल आशीष कुमार और सलीम खान ने घर में घुसकर गालीगलौज की और धमकाया। सरकारी वकील का कहना था कि याची के पति पर एनडीपीएस एक्ट, गुंडा एक्ट और गैम्बलिंग एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। कोर्ट का कहना था कि मात्र मुकदमे दर्ज होने से अभियुक्त दोषी नहीं हो जाता और पुलिस को जब भी चाहे रातबिरात आरोपी के घर दबिश डालने का अधिकार नहीं मिल जाता है।
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गुल्फसा खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर और न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने दिया है। याची के अधिवक्ता का कहना है कि याची के पति सभासद चुनाव में प्रत्याशी था। उसी समय से पुलिस ने परिवार को परेशान करना शुरू कर दिया। थाना इज्जतनगर की पुलिस अक्सर रात में याची के घर में घुसकर दुर्व्यवहार करने लगी। 19 मई 2017 को याची के पति को पुलिस नौ बजे रात पकड़कर ले गई। कोई कारण नहीं बताया। इसकी शिकायत डीएम और एसएसपी से की गई। कोई सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट में धारा 156 (3) में अर्जी दी है, जो लंबित है। आरोप है कि नौ जुलाई 18 की रात साढ़े ग्यारह बजे उपनिरीक्षक सुनील राठी, उपनिरीक्षक लाला राम, कांस्टेबल आशीष कुमार और सलीम खान ने घर में घुसकर गालीगलौज की और धमकाया। सरकारी वकील का कहना था कि याची के पति पर एनडीपीएस एक्ट, गुंडा एक्ट और गैम्बलिंग एक्ट के तहत आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। कोर्ट का कहना था कि मात्र मुकदमे दर्ज होने से अभियुक्त दोषी नहीं हो जाता और पुलिस को जब भी चाहे रातबिरात आरोपी के घर दबिश डालने का अधिकार नहीं मिल जाता है।
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