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हाशिमपुरा के पीड़ितों को मुआवजा देने में भेदभाव क्यों
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 09 Jul 2015 01:58 AM IST
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मेरठ दंगे में हाशिमपुरा गोलीकांड के शिकार लोगों को मुआवजा देने में भेदभाव पर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब कर लिया है। घटना के 351 पीड़ितों में से सिर्फ 38 मृतकों के परिवारों और पांच घायलों को ही पांच लाख रुपये मुआवजा देने का आरोप है। शेष पीड़ितों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। इस मामले में सामाजिक संस्था सच के अध्यक्ष संदीप पहल ने जनहित याचिका दाखिल की है।
याची का कहना है कि 1987 के मेरठ दंगे में हाशिमपुरा में पीएसी की गोली से 351 लोगों की मौत हुई या लापता हुए। 173 लोग घायल भी हुए थे। घटना के तत्काल बाद मृतकों के परिवारों को सरकार ने 20-20 हजार रुपये का मुआवजा दिया। घायलों को 500-500 रुपये दिए गए। फिर 1991 में भी 20-20 हजार रुपये मुआवजे की किश्त दी गई। इसके बाद समुदाय विशेष के 39 लोगों को चार लाख 60 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए, मगर शेष 312 परिवारों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
इस साल भी सरकार ने पांच जून 2015 को समुदाय विशेष के 38 मृतकों के परिवारों और पांच घायलों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए हैं। पीड़ितों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है जो अनुचित और असंवैधानिक है। मांग की गई है कि सभी पीड़ितों को एक समान मुआवजे की राशि दी जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि दंगा पीड़ितों में से मुआवजे के लिए कुछ लोगों को चुनने का क्या आधार है। सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करना है। अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी।
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याची का कहना है कि 1987 के मेरठ दंगे में हाशिमपुरा में पीएसी की गोली से 351 लोगों की मौत हुई या लापता हुए। 173 लोग घायल भी हुए थे। घटना के तत्काल बाद मृतकों के परिवारों को सरकार ने 20-20 हजार रुपये का मुआवजा दिया। घायलों को 500-500 रुपये दिए गए। फिर 1991 में भी 20-20 हजार रुपये मुआवजे की किश्त दी गई। इसके बाद समुदाय विशेष के 39 लोगों को चार लाख 60 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर दिए गए, मगर शेष 312 परिवारों को कोई मुआवजा नहीं दिया गया।
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इस साल भी सरकार ने पांच जून 2015 को समुदाय विशेष के 38 मृतकों के परिवारों और पांच घायलों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर दिए हैं। पीड़ितों के बीच धर्म के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है जो अनुचित और असंवैधानिक है। मांग की गई है कि सभी पीड़ितों को एक समान मुआवजे की राशि दी जाए। याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि दंगा पीड़ितों में से मुआवजे के लिए कुछ लोगों को चुनने का क्या आधार है। सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करना है। अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी।
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