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Prayagraj : तर्पण कर पितरों को मोक्ष दिलाने के लिए किया पिंडदान, संगम तट पर उमड़ रही भारी भीड़

Thu, 19 Sep 2024 05:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Sep 2024 05:03 PM IST
सार

संगम तट पर एक तरफ मुंडन कराने और दूसरी ओर पंक्तिबद्ध होकर पिंडदान करने का सिलसिला दिन भर चला। बस, निजी वाहनों से बड़ी संख्या में लोग पूर्वांचल के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से भी पहुंचे। संगम पर मुंडन कराकर लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई।

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Pinddaan performed to provide salvation to the ancestors by offering tarpan, huge crowd gathered on the banks
संगम तट पर पिंडदान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पितरों के मोक्ष और आत्मा की शांति के लिए बुधवार को पितृपक्ष की प्रतिपदा तिथि पर संगम पर तर्पण, अर्पण और श्राद्ध के लिए भीड़ लगी रही। बाढ़ की वजह से त्रिवेणी बांध पर ही चौकियां लगाई गईं। यजमानों के साथ लोगों ने अपने पूर्वजों का विधि-विधान से तर्पण कर पिंडदान किया। साथ ही पितरों को तरह-तरह के व्यंजनों का भोग लगाया।

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संगम तट पर एक तरफ मुंडन कराने और दूसरी ओर पंक्तिबद्ध होकर पिंडदान करने का सिलसिला दिन भर चला। बस, निजी वाहनों से बड़ी संख्या में लोग पूर्वांचल के अलावा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से भी पहुंचे। संगम पर मुंडन कराकर लोगों ने गंगा में डुबकी लगाई। सनातनी परंपरा में पितृपक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के पीछे मोक्ष प्राप्ति की धारणा सदियों पुरानी है। 
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भीष्म पितामह स्थल का किया जाए विकास

पितृ-पक्ष भारत की सनातन संस्कृति की विशिष्टता का परिचायक है। भीष्म पितामह का स्मरण कर उन्हें अपने पूर्वज की भांति जलांजलि अर्पित करना पर्व की विशेषता है। यह बातें उप्र सरकार के पूर्व मंत्री डॉ. नरेंद्र कुमार सिंह गौर ने बुधवार को दारागंज के भीष्म पितामह प्रतिमा स्थल पर आयोजित दीपदान व माल्यार्पण कार्यक्रम में कही। कहा कि भीष्म पितामह मंदिर व नागवासुकि मंदिर के विकास से आध्यात्मिक स्थलों की दशा-दिशा निश्चय ही नए स्वरूप में दिखेगी।
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काशी क्षेत्र भाजपा उपाध्यक्ष अवधेश चंद्र गुप्त ने कहा कि भीष्म पितामह का यह मंदिर गौरव स्थल के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। पुजारी पं. श्यामधर त्रिपाठी ने विधि-विधान से पूजन करवाया। संचालन कर रहे व्रतशील शर्मा ने कहा कि यह स्थान भारत की सनातन संस्कृति को समर्पित स्थान है। दर्शनार्थियों ने मांग की प्रतिमा स्थल के विकास के क्रम में मंदिर के प्रवेश-द्वार पर बड़ा और आकर्षक विवरण-फलक भी लगवाया जाए। प्रकाश की व्यवस्था, सुबह व शाम आरती की भी व्यवस्था हो। चंडी पत्रिका के संपादक ऋतशील शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर पं. शेषनारायण पांडेय, अनुपम सिन्हा, त्रिभुवन पांडेय, अनंत अग्निहोत्री, अंजनी सिंह, वेदप्रकाश पांडेय, बजरंगबली गिरि, अंशुमान त्रिपाठी रहे। 

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