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राज्यपाल राम नाईक की बर्खास्तगी के लिए पीआईएल
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Tue, 06 Jan 2015 11:41 PM IST
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उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक को पद से बर्खास्त करने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में राज्यपाल के उस बयान को आधार बनाया गया है, जिसमें उन्होंने राम मंदिर बनाने का समर्थन किया है। याचिका सिटिजन फॉर डेमोक्रेसी के सचिव आनंद मालवीय के द्वारा दाखिल याचिका में राज्यपाल पर संवैधानिक पद के विरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाया गया है।
याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल राम नाईक ने 11 दिसंबर 2014 को फैजाबाद में अपने एक बयान में कहा कि ‘राम मंदिर जल्द बने ऐसी भारतीय नागरिकों की इच्छा है, और उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी पांच वर्षों में राम मंदिर बनाने का रास्ता ढूंढ निकालेगें।’ राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीमकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में पंथ विशेष के पक्ष में बयान देकर उन्होंने पद की गरिमा के विपरीत आचरण किया है। हाईकोर्ट से केंद्र सरकार को आदेश देने की मांग की गई है कि वह राज्यपाल को बर्खास्त कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करे।
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याचिका में कहा गया है कि राज्यपाल राम नाईक ने 11 दिसंबर 2014 को फैजाबाद में अपने एक बयान में कहा कि ‘राम मंदिर जल्द बने ऐसी भारतीय नागरिकों की इच्छा है, और उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी पांच वर्षों में राम मंदिर बनाने का रास्ता ढूंढ निकालेगें।’ राम मंदिर का मुद्दा सुप्रीमकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में पंथ विशेष के पक्ष में बयान देकर उन्होंने पद की गरिमा के विपरीत आचरण किया है। हाईकोर्ट से केंद्र सरकार को आदेश देने की मांग की गई है कि वह राज्यपाल को बर्खास्त कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करे।
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