Mahakumbh : 10 साल से नागा संन्यासी के साथ धूनी रमा रहा है हरी पुरी नाम का कबूतर, महाकुंभ में किया अमृत
महाकुंभ में देश भर से आए नागा संन्यासियों के तरह-तरह के रूप देखने को मिल रहे है। इन्हीं में जूना अखाड़े से जुड़े एक कबूतर बाबा हैं। जिनका नाम राज पुरी है। उनके साथ हमेशा एक कबूतर रहता है।
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दिव्य और भव्य महाकुंभ में संगम की रेती पर अखाड़ों के साधु-संत ही बल्कि उनके साथ हरी पुरी नाम के कबूतर पक्षी भी धूनी रमा रहे हैं। अखाड़ों के संत की तरह पक्षी का भी नामकरण किया गया है। गुरु राज पुरी ने बताया कि मकर संक्रांति के मौके पर उनके साथ उनका कबूतर शिष्य भी अमृत स्नान किया था। वह भी कबूतर जूना अखाड़े से जुड़ा हुआ है।
महाकुंभ में देश भर से आए नागा संन्यासियों के तरह-तरह के रूप देखने को मिल रहे है। इन्हीं में जूना अखाड़े से जुड़े एक कबूतर बाबा हैं। जिनका नाम राज पुरी है। उनके साथ हमेशा एक कबूतर रहता है। बातचीत में बाबा बताते हैं कि करीब 10 साल पहले उनके पास कबूतर आया था। वह उनकी हर बात को समझता है। इसलिए अब वह कबूतर उनका शिष्य बन चुका है। अखाड़े के संन्यासियोें की तरह उसका नाम भी हरी पुरी रखा गया है। सभी साधुओं के साथ वह भी मकर संक्रांति पर संगम में अमृत स्नान किया था।
वह लोगों को सभी जीवों की सेवा करने का संदेश देते हैं और कहते हैं धरती पर रहने वाला हर एक जीव, शिव है। इसलिए यदि आप किसी भी जीव की सेवा करते हैं तो वह शिव की सेवा करने के बराबर होगा। बाबा कहते हैं कि जीव सेवा परमोधरम, बाकि इस दुनिया में सब मिथ्या है। कबूतर हमेशा बाबा के सिर और कंधे पर ही बैठा मिलता है। इसकी वजह से अब राज पुरी महाराज, कबूतर बाबा के नाम से मेले में विख्यात हैं। मेले में आने वाले श्रद्धालु बाबा के पास जाकर सेल्फी और फोटो खींच रहे हैं।