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Prayagraj : वेणी माधव परिक्रमा मार्ग से महंत की भू समाधि हटाने के लिए याचिका दायर
Fri, 03 Jun 2022 09:50 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Jun 2022 09:50 PM IST
सार
वादी शर्मा का कहना है कि वेणी माधव मंदिर एक पौराणिक मंदिर है।जिसमें देश विदेश के तीर्थयात्रियोंए श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है।जिसका पुनर्निर्माण दो सौ साल पहले भूस्वामी माता कार्तिक पांडेय ने कराया था।
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- फोटो : istock
विस्तार
दारागंज स्थित पौराणिक वेणी माधव मंदिर के गर्भगृह परिक्रमा मार्ग में निर्मित ब्रह्मलीन महंत ओंकार गिरि की समाधि हटाने की मांग में दाखिल केस की सुनवाई 11 अगस्त को होगी। यह सिविल वाद मोरी दारागंज निवासी रामचंद्र शर्मा ने अतिरिक्त सिविल जज कनिष्ठ श्रेणी पंचम इलाहाबाद की अदालत में दायर किया है। जिसमें दिवंगत महंत ओंकार गिरि की पुत्री विभा त्रिपाठी सर्वकारा महंत वेणी माधव मंदिर एवं विराजमान वेणी माधव बजरिए सचिव महानिर्वाणी अखाड़ा दारागंज को पक्षकार बनाया गया है।
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वादी शर्मा का कहना है कि वेणी माधव मंदिर एक पौराणिक मंदिर है, जिसमें देश विदेश के तीर्थयात्रियों, श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है। जिसका पुनर्निर्माण दो सौ साल पहले भूस्वामी माता कार्तिक पांडेय ने कराया था। मंदिर के सामने धर्मशाला व शिव मंदिर भी बनवाया था और मंदिर निर्वाणी अखाड़ा को देखरेख पूजापाठ के लिए सौंप दिया गया था। श्रीराम त्रिपाठी सागर मध्य प्रदेश निवासी को अखाड़े ने मंदिर में पुजारी रखा था।उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र ओंकार नाथ त्रिपाठी मंदिर की देखरेख पूजापाठ करने लगे।
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महानिर्वाणी अखाड़े के शिष्य बन गए। मनमुटाव होने पर ओंकार नाथ त्रिपाठी ने वेणी माधव मंदिर सेवा समिति ट्रस्ट गठित कर लिया और अपना नाम ओंकार गिरि रख स्वयं को महंत घोषित करा लिया। जिनका निधन कोरोना काल में पांच मई 2020 को हुआ। उनकी पुत्री विभा त्रिपाठी ने अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्व. नरेंद्र गिरि व जूना अखाड़ा के हरि गिरि के सहयोग से जल समाधि न देकर सात मई को ओंकार गिरि को परिक्रमा मार्ग के किनारे भू समाधि दे दी।
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पुलिस प्रशासन ने कोविड 19 का हवाला देकर विरोध प्रदर्शन पर रोक लगा दी। जिसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दायर की गई है किन्तु अभी तक सुनवाई नहीं हो सकी है। शर्मा का कहना है कि परिक्रमा मार्ग में भू समाधि आस्था से खिलवाड़ है। वादी सहित लाखों श्रद्धालुओं को ठेस पहुंची है। समाधि को हटाने की प्रार्थना की गई है।