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आईएएस राजीव कुमार के खिलाफ याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 03 May 2016 02:31 AM IST
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आईएएस राजीव कुमार को बर्खास्त करने के लिए दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका पंजाब के पूर्व डीजीपी जेएफ रिबेरो और दस अन्य अवकाश प्राप्त आईएएस, आईपीएस अधिकारियों ने दाखिल की थी। याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति आरके कक्कड़ ने सुनवाई की।
प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन और अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को विशेष रूप से अधिकृत किया था। उन्होंने हलफनामा दाखिल कर बताया कि राजीव कुमार ने सीबीआई कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल की है। हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बहाल रखने का आदेश दिया, जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई है। इस पर 10 मई को सुनवाई होनी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि अदालत से मिली सजा मात्र के आधार पर राजीव कुमार को सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। नियमानुसार विभाग जांच करने तथा अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही बर्खास्तगी मुमकिन है। चूंकि प्रकरण अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए बर्खास्तगी मांग औचित्यहीन है।
याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी ने कहा कि राजीव कुमार को नोएडा में प्लाट आवंटन में घोटाले का दोषी करार दिया गया है। उनको तीन वर्ष कैद की सजा दी गई है। हाईकोर्ट से अपील भी खारिज हो चुकी है। राजीव कुमार फिलहाल जमानत पर हैं। हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद उनको बर्खास्त कर देना चाहिए।
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प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता शशिनंदन और अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी को विशेष रूप से अधिकृत किया था। उन्होंने हलफनामा दाखिल कर बताया कि राजीव कुमार ने सीबीआई कोर्ट से मिली सजा के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट में अपील दाखिल की है। हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बहाल रखने का आदेश दिया, जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई है। इस पर 10 मई को सुनवाई होनी है। अधिवक्ताओं ने बताया कि अदालत से मिली सजा मात्र के आधार पर राजीव कुमार को सेवा से बर्खास्त नहीं किया जा सकता है। नियमानुसार विभाग जांच करने तथा अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद ही बर्खास्तगी मुमकिन है। चूंकि प्रकरण अभी सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है इसलिए बर्खास्तगी मांग औचित्यहीन है।
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याची का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी ने कहा कि राजीव कुमार को नोएडा में प्लाट आवंटन में घोटाले का दोषी करार दिया गया है। उनको तीन वर्ष कैद की सजा दी गई है। हाईकोर्ट से अपील भी खारिज हो चुकी है। राजीव कुमार फिलहाल जमानत पर हैं। हाईकोर्ट से सजा की पुष्टि होने के बाद उनको बर्खास्त कर देना चाहिए।
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