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पीसीएस में इलाहाबादियों का दबदबा

Wed, 02 Mar 2016 01:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 02 Mar 2016 01:50 AM IST
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PCS dominated Ilahabadion

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से सोमवार देर रात घोषित परिणाम में इलाहाबाद के प्रतियोगियों का दबदबा रहा। टॉपर्स की सूची में तो यहां के प्रतियोगी छाए ही रहे, चयनितों की सूची में भी इनकी बड़ी संख्या है। इस सफलता का असर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावासों तथा डेलीगेसी में भी दिखा और हर जगह जश्न का माहौल रहा।

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टॉपर सिद्धार्थ यादव एमएनएनआईटी के छात्र थे तो तृतीय स्थान पर प्रशांत तिवारी ने भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा हासिल की है। शैलेंद्र प्रताप का एसडीएम, संजू राय का असिस्टेंट कमिश्नर, विश्वविद्यालय से स्नातक एवं परास्नातक चंद्रेश त्रिपाठी का जिला विकलांग कल्याण अधिकारी, रूपेश कुमार आनंद का सहायक आयुक्त उद्योग के पद पर चयन हुआ है। मूलत: प्रतापगढ़ के शैलेंद्र का पूर्व में डिप्टी एसपी पर चयन हो चुका है। संजू के पिता भरत राय कॉल्विन अस्पताल में कनिष्ठ लिपिक हैं। रूपेश ने पहले प्रयास में यह सफलता हासिल की है। आईपीएस अशोक कुमार पांडेय के पुत्र अतुल पांडेय का ट्रेजरी ऑफिसर पद पर चयन हुआ है। 

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आयोग में कार्यरत सलीम सिद्दीकी की पत्नी नूरुरशबा का सीटीओ, छोटा बघाड़ा के सत्येंद्र कुमार यादव का सब रजिस्ट्रार, आयोग में समीक्षा अधिकारी कृष्ण चंद्र त्रिपाठी की पुत्री प्राची त्रिपाठी का नायब तहसीलदार, हर्ष प्रताप सिंह का आयुक्त लघु उद्योग एवं विनिर्माण, झूंसी के कमलेंद्र कुमार कुशवाहा का नायब तहसीलदार, कालिंदीपुरम के प्रतीक सिंह का असिस्टेंट कमिश्नर, कल्पना जायसवाल का असिस्टेंट सेवा इंप्लायमेंट ऑफिसर, पूजा पांडेय डीपीओ पद पर चयन हुआ है। सुनील प्रताप सिंह, नीरज सिंह, प्रभाष सिंह, संतराम वर्मा, विनोद सिंह, सुशील सिंह, विकास सिंह, रामनरेश वर्मा, नीरज कुमार पांडेय, रामनरेश वर्मा, बृजमोहन शुक्ला, देव कुमार चतुर्वेदी, संजय, गोविंद कुमार मिश्रा आदि पीसीएस-2015 में अलग-अलग पदों पर चयनित हुए हैं।

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लगन और लक्ष्य तय हो तो र्कोई भी सफलता बहुत दिनों तक दूर नहीं रह सकती। वाणिज्य कर अधिकारी पद पर चयनित उत्कर्ष पांडेय का जज्बा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। मूलत: गोरखपुर के उत्कर्ष की आर्थिक स्थिति इतनी खराब रही कि भरण-पोषण के लिए उन्हें गुजरात जाना पड़ा। वहां उन्होंने एक फैक्ट्री में मजदूरी की, लेकिन अफसर बनने की ललक उन्हें इलाहाबाद खींच लाई। दोस्तों की सलाह पर उन्होंने सिविल सेवा की तैयारी शुरू की। दोस्त भी सिर्फ सलाह देने तक नहीं रुके, उन्होंने उत्कर्ष की आर्थिक मदद भी की। उत्कर्ष का कहना है कि उनकी इस सफलता में मित्रों का पूरा साथ रहा।

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