पीसीएस: आयु सीमा, अवसर में नहीं होगी कटौती, पूरी जानकारी यहां मिलेगी
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) पीसीएस परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित आयु सीमा में न तो कोई कटौती करने जा रहा है न ही अवसर की बाध्यता लागू करने जा रहा है। इस मसले पर आयोग में सोमवार को प्रदर्शन करने पहुंचे प्रतियोगी छात्रों के समक्ष आयोग के सचिव जगदीश ने स्थित स्पष्ट कर दी है। सचिव से आश्वासन मिलने के बाद सभी अभ्यर्थी वहां से लौट गए।
कुछ दिनों पहले चर्चा शुरू हो गई थी कि आयोग पीसीएस में शामिल होने के निर्धारित आयु सीमा में कटौती और अवसर की बाध्यता लागू करने पर विचार कर रहे है। इस चर्चा के सामने आने के बाद प्रदेश भर में प्रतियोगी छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया और आयोग अध्यक्ष डॉ. प्रभात कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। सोमवार को हजारों की संख्या में छात्र आयोग के बाहर इकट्ठा हो गए। बवाल की आशंका को देखते हुए आयोग परिसर के आसपास बड़ी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई और आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया।
एक घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से प्रतियोगी छात्रों का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आयोग के सचिव जगदीश ने मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में शामिल संदीप सिंह, अलोक सिंह, विवेक उपाध्याय, प्रतिभा और पंकज सिंह ने सचिव के समक्ष प्रतियोगी छात्रों की चार प्रमुख मांगें रखीं। उनकी मांगें थीं कि आयु सीमा में कटौती और अवसर में बाध्यता लागू न की जाए, अवर अधीनस्थ की परीक्षा पूर्व की भांति आयोग कराए, पीसीएस प्री में पद के मुकाबले 13 गुना की जगह पहले की तरह 18 गुना अभ्यर्थियों को पास किया जाए और पीसीएस मुख्य परीक्षा में पूर्व की भांति समाज कार्य एवं रक्षा अध्ययन विषय को शामिल किया जाए।
‘वार्ता के लिए अभ्यर्थी आए थे। उनसे बता दिया गया है कि पीसीएस परीक्षा में आयु सीमा में कटौती और अवसर की बाध्यता को लेकर आयोग ने न तो कोई निर्णय लिया है न ही इस बाबत कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। आयोग ऐसा कोई बदलाव नहीं करने जा रहा है।’ जगदीश, सचिव, यूपीपीएससी
पेन-कॉपी के साथ किया सरस्वती पूजन
- आयोग में जुटे हजारों प्रतियोगी अपने साथ पेन-कॉपी भी लेकर पहुंचे थे। प्रतियोगी छात्रों ने वहां सरस्वती पूजन भी किया और शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठे रहे। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे सांकेतिक रूप से पेन-कॉपी लेकर पहुंचे हैं ताकि यह संदेश दिया जा सके कि यह आंदोलन आम छात्रों का हैं और इसमें किसी संगठन या राजनैतिक दल का कोई हस्तक्षेप नहीं है।