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धूल के गुबार से बढ़ रहे अस्थमा के मरीज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 02 Apr 2018 02:02 PM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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शहर के विवेकानंद मार्ग, अल्लापुर, बैरहना, लीडर रोड, अलोपीबाग , रामबाग, पानी टंकी समेत अनेक इलाकों की हवा धूल के गुबार के कारण दम घोंटू हो चुकी है। जगह-जगह सड़क की खोदाई ,निर्माण कार्यों के चलते यहां सांस लेना दूभर हो गया है। करीब-करीब ऐसी ही स्थित जानसेनगंज, एमएनएनटी क्रॉसिंग और राजरुपपुर, शिवकुटी की है।
शहर के इन इलाकों में वायु प्रदूषण परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानक सामान्य से तीन गुना अधिक होने से हवा जहरीली हो गई है। हर तरफ उड़ती धूल के कारण शहर में अस्थमा के मरीज मरीज बढ़ रहे हैं। संगमनगरी में वायु प्रदूषण की स्थिति चौंकाने वाली है। हर दिन तेज हो रही धूप के बीच धूल के सूक्ष्म कण हवा को प्रदूषित कर रहे हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय इकाई की ओर से शहर के कई इलाकों में कराई गई पहले की रिपोर्ट में कटरा, अशोक नगर, लक्ष्मी टॉकीज चौराहा में वायु प्रदूषण सामान्य से तीन गुना अधिक 300 पाया गया था, जो अभी बरकरार है। यहां के साथ धूल प्रभावित इलाकों में पार्टीकल मैटर (सूक्ष्म कण) बढ़े हैं। प्रभावित स्थानों पर वायु प्रदूषण हर समय घटता-बढ़ता रहता है।
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प्रदूषण की जांच करने वाली नोडल एजेंसी एमएनएनआईटी बोर्ड की ताजा रिपोर्ट अभी नहीं आई है, संभावना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एजेंसी से मिलने वाली ताजा प्रदूषण रिपोर्ट और चौंकने वाली हो सकती है।धूल से बढ़ रहे प्रदूषण का असर सीधा लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। लोगों के फेफड़े संक्रमित हो रहे हैं। दमा और सांस के रोगियों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मौसम में अस्थमा और दिल के रोगियों के साथ बच्चों को भी बचाकर रखना चाहिए। छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ और एएमए के वैज्ञानिक सचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता के मुताबिक उनकी ओपीडी में आने वाले रोगियों की संख्या बीते 15 दिनों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।
खांसी के मरीजों को हल्की दवाएं असर ही नहीं कर रही हैं। अस्थमा और सीओपीडी पीड़ितों मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हैं। हर दिन पांच से दस नए मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूल के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना बेहतर होगा। बलगम, खासी या जकड़न की शिकायत हो या फिर सर्दी-जुकाम के साथ बुखार चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा लें।
वहीं एसआरएन अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरएन पांडेय ने बताया कि प्रदूषण से बुजुर्गों-बच्चों को बचाने के लिए खास सावधानी बरतनी होगी। मधुमेह रोगी नियमित जांच कराते रहें। दिनचर्या नियमित रखें। सुबह-शाम टहलने निकलें तो पार्क पहुंचने तक मास्क जरूर लगाएं। घबराहट या घुटन समेत अन्य किसी परेशानी का अनुभव हो तो डॉक्टर की सलाह तुरंत लें।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक एसके मिश्रा के मुताबिक यहां वायु प्रदूषण कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक पाया गया है। यहां गाजियाबाद या अन्य अधिक वायु प्रदूषण वाले शहरों की तरह खतरनाक स्थिति नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण मापने का काम कंप्यूटराईज्ड है और यहां मैकेनिकल। प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद रिपोर्ट जारी की जाती है।
वायु प्रदूषण गुणता का मानक (सामान्य) 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
वायु प्रदूषित इलाके (मानक से अधिक करीब 300 गुना अधिक)
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शहर के इन इलाकों में वायु प्रदूषण परिवेशीय वायु गुणवत्ता मानक सामान्य से तीन गुना अधिक होने से हवा जहरीली हो गई है। हर तरफ उड़ती धूल के कारण शहर में अस्थमा के मरीज मरीज बढ़ रहे हैं। संगमनगरी में वायु प्रदूषण की स्थिति चौंकाने वाली है। हर दिन तेज हो रही धूप के बीच धूल के सूक्ष्म कण हवा को प्रदूषित कर रहे हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय इकाई की ओर से शहर के कई इलाकों में कराई गई पहले की रिपोर्ट में कटरा, अशोक नगर, लक्ष्मी टॉकीज चौराहा में वायु प्रदूषण सामान्य से तीन गुना अधिक 300 पाया गया था, जो अभी बरकरार है। यहां के साथ धूल प्रभावित इलाकों में पार्टीकल मैटर (सूक्ष्म कण) बढ़े हैं। प्रभावित स्थानों पर वायु प्रदूषण हर समय घटता-बढ़ता रहता है।
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प्रदूषण की जांच करने वाली नोडल एजेंसी एमएनएनआईटी बोर्ड की ताजा रिपोर्ट अभी नहीं आई है, संभावना है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एजेंसी से मिलने वाली ताजा प्रदूषण रिपोर्ट और चौंकने वाली हो सकती है।धूल से बढ़ रहे प्रदूषण का असर सीधा लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। लोगों के फेफड़े संक्रमित हो रहे हैं। दमा और सांस के रोगियों की संख्या अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वायु प्रदूषण से बचने के लिए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इस मौसम में अस्थमा और दिल के रोगियों के साथ बच्चों को भी बचाकर रखना चाहिए। छाती और फेफड़ा रोग विशेषज्ञ और एएमए के वैज्ञानिक सचिव डॉ. आशुतोष गुप्ता के मुताबिक उनकी ओपीडी में आने वाले रोगियों की संख्या बीते 15 दिनों में अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है।
खांसी के मरीजों को हल्की दवाएं असर ही नहीं कर रही हैं। अस्थमा और सीओपीडी पीड़ितों मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हैं। हर दिन पांच से दस नए मरीज आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि धूल के संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाना बेहतर होगा। बलगम, खासी या जकड़न की शिकायत हो या फिर सर्दी-जुकाम के साथ बुखार चिकित्सक से परामर्श लेकर दवा लें।
वहीं एसआरएन अस्पताल के फिजीशियन डॉ. आरएन पांडेय ने बताया कि प्रदूषण से बुजुर्गों-बच्चों को बचाने के लिए खास सावधानी बरतनी होगी। मधुमेह रोगी नियमित जांच कराते रहें। दिनचर्या नियमित रखें। सुबह-शाम टहलने निकलें तो पार्क पहुंचने तक मास्क जरूर लगाएं। घबराहट या घुटन समेत अन्य किसी परेशानी का अनुभव हो तो डॉक्टर की सलाह तुरंत लें।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक एसके मिश्रा के मुताबिक यहां वायु प्रदूषण कुछ स्थानों पर सामान्य से अधिक पाया गया है। यहां गाजियाबाद या अन्य अधिक वायु प्रदूषण वाले शहरों की तरह खतरनाक स्थिति नहीं है। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण मापने का काम कंप्यूटराईज्ड है और यहां मैकेनिकल। प्रयोगशाला में परीक्षण के बाद रिपोर्ट जारी की जाती है।
वायु प्रदूषण गुणता का मानक (सामान्य) 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर
वायु प्रदूषित इलाके (मानक से अधिक करीब 300 गुना अधिक)