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Prayagraj : मृत व्यक्ति के विरुद्ध पारित आदेश शून्य होता है, राजस्व परिषद ने निरस्त किया एसडीएम का फैसला
Fri, 24 Apr 2026 02:42 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 24 Apr 2026 02:42 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने कहा कि किसी मृत व्यक्ति के विरुद्ध पारित आदेश विधि की दृष्टि में शून्य होता है। इसके साथ ही परिषद ने करछना उपजिलाधिकारी की ओर से पारित आदेश को निरस्त कर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है।
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कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने कहा कि किसी मृत व्यक्ति के विरुद्ध पारित आदेश विधि की दृष्टि में शून्य होता है। इसके साथ ही परिषद ने करछना उपजिलाधिकारी की ओर से पारित आदेश को निरस्त कर फिर से सुनवाई करने का आदेश दिया है। राजस्व परिषद के सदस्य (न्यायिक) साहब सिंह ने यह आदेश राधेकृष्ण की ओर से दायर वाद पर दिया है।
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करछना निवासी राधेकृष्ण ने करछना उपजिलाधिकारी के दो सितंबर 2016 को दिए आदेश के खिलाफ वाद दायर किया था। याची ने दलील दी कि अवर न्यायालय ने रिव्यू प्रार्थना पत्र पर बिना गहन विचार के खारिज कर दिया और विवादित भूमि के संबंध में पारिवारिक समझौते की शर्तों की अनदेखी की। वहीं रिव्यू प्रार्थना पत्र लंबित रहने के दौरान विपक्षी राधेश्याम की मृत्यु हो गई। इसके बावजूद अवर न्यायालय ने उनके विधिक उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाए बिना ही अंतिम आदेश पारित कर दिया।
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परिषद ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश-22 नियम-4 के अनुसार किसी पक्षकार की मृत्यु होने पर उसके विधिक वारिस को पक्षकार बनाना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर कार्यवाही अवैध हो जाती है। साथ ही मृत व्यक्ति के विरुद्ध दिया गया आदेश स्वतः शून्य हो जाता है। परिषद ने दो सितंबर 2016 के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को अवर न्यायालय के पास भेज दिया है।
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सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश-22 नियम-4 के तहत यदि वाद (मुकदमे) के दौरान प्रतिवादी की मृत्यु हो जाती है और वाद का कारण बना रहता है। तो मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को 90 दिन के भीतर रिकाॅर्ड पर लाना अनिवार्य होता है। यदि ऐसा नहीं होता तो मुकदमा मृत प्रतिवादी के खिलाफ खारिज हो सकता है।