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होमगार्ड कमांडेंट की बर्खास्तगी का आदेश रद्द, सेवा बहाली का हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

Sat, 24 Jul 2021 09:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 24 Jul 2021 09:08 PM IST
सार

  •  जिम्मेदारों को बख्शाए जिससे नाराज़ उस पर की कार्रवाई

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Order of dismissal of Home Guard Commandant canceled, High Court directed for restoration of service
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला कमांडेंट होमगार्ड लखनऊ कृपाशंकर पांडेय की सेवा बर्खास्तगी रद्द कर दी है और समस्त परिलाभों सहित सेवा बहाली का निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची कमांडेंट की बर्खास्तगी को दुर्भावना पूर्ण करार देते हुए कहा है कि जिन अधिकारियों की जवाबदेही थी, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अपर मुख्य सचिव ने याची के जांच में बरी होने पर कोर्ट के निर्देश के बावजूद निर्णय लेने के बजाय लटकाए रखा।
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उसे अवमानना केस दायर करने को मजबूर किया। केस दायर करने पर सबक सिखाने के लिए मनमानी जांच करा कर बर्खास्त कर दिया। जिस अनियमितता के आरोप के लिए बर्खास्तगी की गई। उसकी जिम्मेदारी में ही नहीं थी। कोर्ट ने कहा ऐसी मनमानी कार्रवाई का अनुमोदन नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने कृपाशंकर पांडेय की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

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याची पर आरोप लगाया गया कि उसने थाना विभूति खंडए गोमतीनगर में 9 होमगार्ड तैनात किए, जिसमें से पांच ने ड्यूटी नहीं की। चार ने अधूरी ड्यूटी की। वित्तीय अनियमितता की गई। जांच रिपोर्ट में याची को बरी कर दिया गया और कहा गया कि होमगार्ड की ड्यूटी एनआईसी साफ्टवेयर के जरिए लगाई जाती हैं। प्लाटून कमांडर/ कंपनी कमांडर थानाध्यक्ष की निगरानी में ड्यूटी लगाते हैं।
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अपर मुख्य सचिव द्वारा जांच रिपोर्ट पर निर्णय न लेने पर लखनऊ पीठ में याचिका दायर की। कोर्ट ने एक माह में निर्णय लेने को कहा। जिसका पालन नहीं किया तो अवमानना याचिका दायर की गई। अपर मुख्य सचिव ने नाराज होकर जांच सही नहीं माना। फिर से जांच बैठाई। एफआईआर दर्ज कराई गई। याची को हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा किया गया। जांच में पूरक आरोप पत्र का जवाब न देने के कारण आरोप साबित मान बर्खास्त कर दिया गया। जिसे चुनौती दी गई थी।

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