UPPSC : एक दिन की परीक्षा के लिए 55 फीसदी केंद्र ही मिल सके, पौने छह लाख अभ्यर्थी हैं पंजीकृत
पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2024 के लिए 576154 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं और आयोग को जिलाधिकारियों के माध्यम से मानक के अनुसार 978 परीक्षा केंद्रों की ही सहमति प्राप्त हुई, जिनमें 435074 अभ्यर्थियों की ही परीक्षा कराई जा सकती है जबकि पिछली चार परीक्षाओं के आंकड़े देखें तो प्रवेश पत्र डाउनलोड करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या इससे अधिक रही।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2024 के लिए प्रदेश के 75 जिलों में 1758 केंद्रों की जरूरत थी लेकिन आयोग को 55 फीसदी ही केंद्र मिल सके। पीसीएस प्रारंभिक परीक्षा-2024 के लिए 576154 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं और आयोग को जिलाधिकारियों के माध्यम से मानक के अनुसार 978 परीक्षा केंद्रों की ही सहमति प्राप्त हुई, जिनमें 435074 अभ्यर्थियों की ही परीक्षा कराई जा सकती है जबकि पिछली चार परीक्षाओं के आंकड़े देखें तो प्रवेश पत्र डाउनलोड करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या इससे अधिक रही।
आयोग के सचिव अशोक कुमार के अनुसार पीसीएस 2020 में पंजीकृत 595700 अभ्यर्थियों में से 47039 (79.58 फीसदी) ने प्रवेशपत्र डाउनलोड किए थे और 314699 अभ्यर्थी (66.36 फीसदी) परीक्षा में शालि हुए थे। 2021 में पंजीकृत 691173 में से 516491 अभ्यर्थियों (74.72 फीसदी) ने प्रवेशपत्र डाउनलोड किए और परीक्षा में 321273 (62.20 फीसदी) शामिल हुए।
वहीं, 2022 में पंजीकृत 605023 में से 515737 (85.40 फीसदी) ने प्रवेशपत्र डाउनलोड किए और 329309 (63.09 फीसदी) उपस्थित रहे जबकि 2023 में पंजीकृत 567657 अभ्यर्थियों में से 209678 (89.78 फीसदी) ने प्रवेशपत्र डाउनलोड किए और परीक्षा में 345022 परीक्षार्थी (67.69 फीसदी) शामिल रहे। सचिव के अनुसार ये आंकड़े बताते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में परीक्षा का आयोजन एक दिन में संभव नहीं है।
आरओ-एआरओ परीक्षा में पंजीकृत हैं 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी
आरओ/एआरओ परीक्षा में तो 1076004 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं, जिनकी संख्या पीसीएस परीक्षा के मुकाबले कहीं अधिक है। शासनादेश के अनुसार ऐसे परीक्षा केंद्र न बनाएं जाएं जो प्राइवेट या अधोमानक हों। शासनादेश के अनुसार कलेक्ट्रेट/कोषागार से 20 किमी की परिधि तक परीक्षा केंद्रों के विस्तार की कोशिश की गई। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी शामिल करने की कोशिश की गई लेकिन पर्याप्त संख्या में केंद्र नहीं मिल सके।
हर संभव प्रयास करने के बावजूद पर्याप्त संख्याा में परीक्षा केंद्र उपलब्ध न होने के कारण एक से अधिक दिनों में परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और इन परिस्थितियों में प्रसामान्यीकरण (नॉर्मलाइजेशन) की प्रक्रिया को अपनाया गया, जिसे सिविल अपील उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य बनाम अतुल कुमार द्विवेदी व अन्य में सात जनवरी 2024 को पारित उच्चतम न्यायालय के निर्णय में उचित माना गया है।
दूसरे राज्यों में भी लागू है नॉर्मलाइजेशन
सचिव के अनुसार बहुपालीय परीक्षा कराए जाने की दशा में आंध्र प्रदेश, केरल एवं तेलंगाना आदि प्रदेशों के राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा भी नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का भ्रम न रहे, सो यूपीपीएससी ने पहली बार विज्ञप्ति के माध्यम से इसे सार्वजनिक किया है।