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त्रिजटा स्नान, एक दिन में महीने भर का फल
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One day month fruit earned from Trijata bath
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। फाल्गुन की तृतीया पर मंगलवार को संगम में संतों-भक्तों ने त्रिजटा स्नान किया। दिन भर डुबकी लगी और महीने भर केकल्पवास और स्नान, ध्यान का पुण्य फल अर्जित किया। इसी के साथ माघी पूर्णिमा के बाद बचे शिविर भी खुल गए। महीने भर कल्पवासियों से गुलजार रहे मेला के सभी छह सेक्टरों में खाली पन नजर आने लगा है। त्रिजटा स्नान केसाथ ही तंबुओं को समेटने का काम तेज हो गया है।
संगम पर मंगलवार को भोर में ही त्रिजटा स्नान की डुबकूी लगने लगी। स्नान के साथ ही बड़ी तादाद में लोगों ने दान और ध्यान किया। कहीं गीत गूंजते रहे तो कहीं दीपदान होता रहा। इस स्नान के बाद बड़ी संख्या में शिविर समेट लिए गए। हालांकि अभी खाक चौक में कुछ संतों के शिविर शिवरात्रि स्नान तक रहेंगे। इसके चलते मेला क्षेत्र के सेक्टर एक व दो में चहल-पहल बनी रहेगी। मान्यता है कि माघ मेला में प्रवास करने वालों के लिए त्रिजटा स्नान सर्वाधिक फलदायी होता है। जो लोग महीने भर संगम में डुबकी नहीं लगा पाते, वो इस तिथि पर स्नान कर पूरे महीने भर के कल्पवास का फल अर्जित कर लेते हैं। इस मान्यता को ध्यान में रखकर लोगों ने त्रिजटा स्नान किया। दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा में रुके संन्यासी त्रिजटा स्नान के साथ ही अपने आश्रम की ओर रवाना हो गए। फिलहाल मेले का औपचारिक समापन शिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के बाद होगा।
त्रिजटा राक्षसी के नाम पर होता है स्नान
प्रयागराज। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार पुराणों में त्रिजटा स्नान की मान्यता त्रेता युग में सीता के पंचवटी प्रवास से की गई है। उन्होंने बताया कि रावण जब मां सीता का हरण कर उनको लंका ले गया था, तब त्रिजटा नामक राक्षसी ने उनकी सेवा की थी। वह उनकी निगरानी में लगाई गई थी, लेकिन उसने सीता के प्रति श्रद्धा व समर्पण से मोक्ष प्राप्त कर लिया था।
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राम नाम की कमाई लेकर श्रद्धालु विदा
प्रयागराज। सेक्टर -एक स्थित राम नाम बैंक के शिविर में महीने भर भगवान के नाम की कमाई अर्जित कर श्रद्धालु मंगलवार को विदा हो गए। राम नाम सेवा संस्थान की अध्यक्ष गुंजन वार्ष्णेय ने बताया कि सैकड़ों लोगों ने इस दौरान रामनाम का खाता इस बैंक में खोला।
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संगम पर मंगलवार को भोर में ही त्रिजटा स्नान की डुबकूी लगने लगी। स्नान के साथ ही बड़ी तादाद में लोगों ने दान और ध्यान किया। कहीं गीत गूंजते रहे तो कहीं दीपदान होता रहा। इस स्नान के बाद बड़ी संख्या में शिविर समेट लिए गए। हालांकि अभी खाक चौक में कुछ संतों के शिविर शिवरात्रि स्नान तक रहेंगे। इसके चलते मेला क्षेत्र के सेक्टर एक व दो में चहल-पहल बनी रहेगी। मान्यता है कि माघ मेला में प्रवास करने वालों के लिए त्रिजटा स्नान सर्वाधिक फलदायी होता है। जो लोग महीने भर संगम में डुबकी नहीं लगा पाते, वो इस तिथि पर स्नान कर पूरे महीने भर के कल्पवास का फल अर्जित कर लेते हैं। इस मान्यता को ध्यान में रखकर लोगों ने त्रिजटा स्नान किया। दंडीबाड़ा, आचार्य बाड़ा में रुके संन्यासी त्रिजटा स्नान के साथ ही अपने आश्रम की ओर रवाना हो गए। फिलहाल मेले का औपचारिक समापन शिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के बाद होगा।
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त्रिजटा राक्षसी के नाम पर होता है स्नान
प्रयागराज। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार पुराणों में त्रिजटा स्नान की मान्यता त्रेता युग में सीता के पंचवटी प्रवास से की गई है। उन्होंने बताया कि रावण जब मां सीता का हरण कर उनको लंका ले गया था, तब त्रिजटा नामक राक्षसी ने उनकी सेवा की थी। वह उनकी निगरानी में लगाई गई थी, लेकिन उसने सीता के प्रति श्रद्धा व समर्पण से मोक्ष प्राप्त कर लिया था।
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राम नाम की कमाई लेकर श्रद्धालु विदा
प्रयागराज। सेक्टर -एक स्थित राम नाम बैंक के शिविर में महीने भर भगवान के नाम की कमाई अर्जित कर श्रद्धालु मंगलवार को विदा हो गए। राम नाम सेवा संस्थान की अध्यक्ष गुंजन वार्ष्णेय ने बताया कि सैकड़ों लोगों ने इस दौरान रामनाम का खाता इस बैंक में खोला।

One day month fruit earned from Trijata bath- फोटो : CITY DESK

One day month fruit earned from Trijata bath- फोटो : CITY DESK

One day month fruit earned from Trijata bath- फोटो : CITY DESK

One day month fruit earned from Trijata bath- फोटो : CITY DESK