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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   On Janmashtami, echoes of five Kanha and eight Radha's chanted in hospitals, people chanted for Kanha.

Janmashtami : जन्माष्टमी पर अस्पतालों में पांच कान्हा और आठ राधाओं की गूंजी किलकारी, लगे कान्हा के जयकारे

Wed, 28 Aug 2024 05:33 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 28 Aug 2024 05:33 PM IST
सार

जन्माष्टमी के अवसर पर जिन परिवारों में बच्चों ने जन्म लिया, वहां खुशिया दोहरी हो गईं। हर तरफ खुशी का माहौल छा गया। एसआरएन हॉस्पिटल में रात 12 बजे के बाद से सुबह छह बजे तक जितने बच्चों ने जन्म लिया, उन्हें डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ सहित मरीज और उनके तीमारदार भगवान कृष्ण का ही स्वरूप मानकर खुशियों का इजहार करते रहे।

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On Janmashtami, echoes of five Kanha and eight Radha's chanted in hospitals, people chanted for Kanha.
जन्माष्टमी पर जन्मे बच्चे। - फोटो : freepik

विस्तार

जन्माष्टमी पर अद्भुत संयोग के बीच अस्पतालों में 13 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें पांच बेटों और आठ बेटियों ने जन्म लिया। जन्म के बाद स्वरूप रानी हॉस्पिटल के स्त्री रोग विभाग की ओटी में हाथी- घोड़ा- पालकी, जय कन्हैया लाल की... के जयकारे लगने लगे। यह जयकारे एक या दो मिनट नही, बल्कि 15 से 20 मिनट तक लगते रहे। इसी तरह डफरिन अस्पताल में भी तीन बच्चों के जन्म के बाद खुशियां छाई रहीं।

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जन्माष्टमी के अवसर पर जिन परिवारों में बच्चों ने जन्म लिया, वहां खुशिया दोहरी हो गईं। हर तरफ खुशी का माहौल छा गया। एसआरएन हॉस्पिटल में रात 12 बजे के बाद से सुबह छह बजे तक जितने बच्चों ने जन्म लिया, उन्हें डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ सहित मरीज और उनके तीमारदार भगवान कृष्ण का ही स्वरूप मानकर खुशियों का इजहार करते रहे। रात 12.40 पर अतरसुइया निवासी गजेंद्र की पत्नी ने जब बेटे को जन्म दिया, तब अस्पताल में ही बधाई गान शुरू हो गया। इस दौरान स्त्री रोग विभाग की ओटी से लेकर हर तरफ कान्हा के जयकारे लगते रहे।
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अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं में आठ राधाएं

रात 12 बजे के बाद से सुबह छह बजे तक डफरिन में तीन और एसआरएन में 10 बच्चों ने जन्म लिया। इसमें डफरिन में दो बेटियां जन्मीं। जबकि, एसआरएन में चार बेटों और छह बेटियों ने जन्म लिया।
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कृष्ण जन्माष्टमी पर जो बच्चे पैदा हुए उन्हें लोगो ने कान्हा ही समझा। इस दौरान सभी की खुशी देखते ही बन रही थी। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग विभाग, एसआरएन।


जन्माष्टमी पर पैदा होने वाले बच्चों को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहा । कान्हा के रूप में शिशुओं के जन्म की खुशियां छाई रहीं। - डॉ. कजरी गुप्ता, प्रमुख अधीक्षक, डफरिन हॉस्पिटल।

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