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ओबीसी सार्टिफिकेट मामला फुलबेंच को रेफर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 07 Apr 2017 01:58 AM IST
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अदालत
पुलिस विभाग में कंप्यूटर ऑपरेटरों की भर्ती में ओबीसी अभ्यर्थियों को जाति प्रमाणपत्र निर्धारित फार्मेट में ही जमा करने का प्रकरण अब हाईकोर्ट की तीन जजों की पीठ सुनेगी। इस मामले में प्रश्न यह उठ गया कि क्या जाति प्रमाणपत्र निर्धारित फार्मेट पर ही स्वीकार्य होगा अथवा सामान्य तरीके से दिया गया प्रमाणपत्र भी स्वीकार किया जा सकता है।
गौरव शर्मा और कई अन्य की ओर से दाखिल अपीलों में कहा गया कि उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र निर्धारित फार्मेट में जमा नहीं किया था। आवेदन के समय प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने के कारण कुछ लोगों ने आवेदन फार्म भरने के बाद जाति प्रमाणपत्र दिया। इस वजह से विभाग ने उनके आवेदन निरस्त कर दिए। मामले पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। याचीगण का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट ने गिजरोया केस में कहा है कि ओबीसी प्रमाणपत्र यदि निर्धारित तिथि के बाद दिया जाता है तब भी उस पर विचार किया जाना चाहिए। जबकि हाईकोर्ट की दो खंडपीठों ने इस प्रकरण पर अलग-अलग मत व्यक्त किए हैं। इस मत भिन्नता को देखते हुए कोर्ट ने प्रकरण वृहदपीठ को संदर्भित कर दिया है।
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गौरव शर्मा और कई अन्य की ओर से दाखिल अपीलों में कहा गया कि उन्होंने अपना जाति प्रमाणपत्र निर्धारित फार्मेट में जमा नहीं किया था। आवेदन के समय प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने के कारण कुछ लोगों ने आवेदन फार्म भरने के बाद जाति प्रमाणपत्र दिया। इस वजह से विभाग ने उनके आवेदन निरस्त कर दिए। मामले पर मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। याचीगण का कहना था कि सुप्रीमकोर्ट ने गिजरोया केस में कहा है कि ओबीसी प्रमाणपत्र यदि निर्धारित तिथि के बाद दिया जाता है तब भी उस पर विचार किया जाना चाहिए। जबकि हाईकोर्ट की दो खंडपीठों ने इस प्रकरण पर अलग-अलग मत व्यक्त किए हैं। इस मत भिन्नता को देखते हुए कोर्ट ने प्रकरण वृहदपीठ को संदर्भित कर दिया है।
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