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रासुका में 12 माह की नजरबंदी का आदेश अवैध
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 01 Jun 2016 01:10 AM IST
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supreme court
हाईकोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत अभियुक्त को 12 माह तक नजरबंद रखने का आदेश अवैध है। जिलाधिकारी को ऐसा आदेश देने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मुरादाबाद में दंगा भड़काने के आरोपी कल्लू की नजरबंदी का आदेश रद्द कर दिया है। कल्लू की याचिका पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति उमेश चंद्र की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची के अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र का कहना था कि पुलिस की रिपोर्ट पर डीएम ने याची को रासुका के तहत 12 माह तक नजरबंद करने का आदेश दिया है, जबकि उनको ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए करते हुए नजरबंदी का आदेश रद्द कर दिया है। प्रकरण के अनुसार मुरादाबाद के मुगलपुरा क्षेत्र में कालीमाता मंदिर के पास 25 जनवरी 2016 को दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी, जिसने सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया। दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई जिसे डीएम ने संज्ञान में नहीं लिया और एकतरफा कार्रवाई कर दी।
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याची के अधिवक्ता दयाशंकर मिश्र का कहना था कि पुलिस की रिपोर्ट पर डीएम ने याची को रासुका के तहत 12 माह तक नजरबंद करने का आदेश दिया है, जबकि उनको ऐसा आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए करते हुए नजरबंदी का आदेश रद्द कर दिया है। प्रकरण के अनुसार मुरादाबाद के मुगलपुरा क्षेत्र में कालीमाता मंदिर के पास 25 जनवरी 2016 को दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी, जिसने सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया। दोनों ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई जिसे डीएम ने संज्ञान में नहीं लिया और एकतरफा कार्रवाई कर दी।
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