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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Now the ' unworthy ' of Principal will interview !

अब फिर ‘अयोग्य’ लेंगे प्रधानाचार्य का साक्षात्कार!

Mon, 18 Apr 2016 12:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 18 Apr 2016 12:57 AM IST
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के तीन सदस्यों डॉ. आशालता सिंह, अनीता यादव और ललित कुमार श्रीवास्तव के काम पर छह जुलाई को हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक हटने के बाद चयन बोर्ड फिर चर्चा में है। बोर्ड के सदस्यों की नियुक्ति मानक के अनुसार नहीं होने और एलटी ग्रेड के शिक्षकों द्वारा प्रधानाचार्य के इंटरव्यू लेने पर ‘अमर उजाला’ ने सवाल उठाए थे। ‘शिक्षक ले रहे प्रधानाचार्य का इंटरव्यू’ शीर्षक से ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित हुई थी, जिसके बाद कानपुर की एक अभ्यर्थी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रधानाचार्य के इंटरव्यू के रिजल्ट पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने छह जुलाई को इन सदस्यों के काम करने पर रोक लगा दी थी। नौ महीने बाद आखिरकार याचिकाकर्ता की ओर से शिकायत वापस ले लिए जाने के बाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले को खत्म कर दिया। 
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अब प्रतियोगी छात्रों ने सवाल उठाया है कि आखिरकार पूरे मामले को गंभीरता से उठाने वाली एक अभ्यर्थी ने किस दबाव में याचिका वापस ली। इससे चयन बोर्ड एवं अभ्यर्थियों का कितना नुकसान हुआ, इसका आकलन जरूरी है। रोक के दौरान ही एक सदस्य डॉ. आशालता सिंह का कार्यकाल खत्म हो जाने से वह अपने मूल पद पर वापस लौट गईं। इन नौ महीनों के दौरान तीनों सदस्यों ने बिना काम किए वेतन भत्ता लिया। अभ्यर्थियों ने सरकार और चयन बोर्ड अध्यक्ष से इस पूरे मामले की जांच कराए जाने की मांग की है। याचिका दाखिल करने वाली ने अनीता यादव एवं ललित कुमार श्रीवास्तव जो इंटर कॉलेज में एलटी ग्रेड शिक्षक हैं, उनकी योग्यता पर सवाल उठाए थे। कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा था कि जो सदस्य स्वयं प्रधानाचार्य के पद पर चयन की अर्हता नहीं रखते वे कैसे प्रधानाचार्य का साक्षात्कार लेंगे। इसके साथ ही चयन बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति में मानक का पालन नहीं किए जाने का भी आरोप लगाया गया था। 

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अपात्रों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का सदस्य बनाए जाने पर सरकार की ओर से मिले जवाब से हाईकोर्ट ने असंतुष्ट होकर सदस्यों के काम करने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में तर्क दिया था कि इन सदस्यों के पास इतनी भी योग्यता नहीं है कि ये टीजीटी-पीजीटी के साथ प्रधानाचार्य के पद के लिए साक्षात्कार ले सकें। अनीता यादव इटावा के केके इंटर कॉलेज में एलटी ग्रेड शिक्षिका हैं तो आशालता विषय विशेषज्ञ से 2007 में प्रवक्ता बन गई हैं जो पर्याप्त अनुभव नहीं होने से साक्षात्कार नहीं ले सकती हैं। इसी प्रकार ललित कुमार श्रीवास्तव शिक्षा विभाग में लिपिक के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक बन सीधे चयन बोर्ड के सदस्य बन गए।

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