{"_id":"5c33b109bdec2256ad22dbbe","slug":"now-it-will-be-only-in-confluence-not-in-the-arena","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब तो सिर्फ संगम में ही होगा विलय,अखाड़े में नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब तो सिर्फ संगम में ही होगा विलय,अखाड़े में नहीं
Tue, 08 Jan 2019 01:42 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 08 Jan 2019 01:42 AM IST
विज्ञापन
प्रयागराज कुंभ 2019
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रद्धालुओं ने जिस आस्था-विश्वास और स्नेह के साथ किन्नर अखाड़ा और इसके संतों का स्वागत तथा सम्मान किया है, उससे विश्वासघात करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है। स्वतंत्र अस्तित्व रखते हुए एक संकल्प और अनुशासन संग उज्जैन में किन्नर अखाड़े का गठन किया गया था और अब भी हम सभी उससे बंधे हुए हैं।
‘अमर उजाला‘ से बातचीत में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने पंचदशनाम जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े के विलय की अटकलों पर पूर्णत: विराम लगा दिया। कहा, पंचदशनाम जूना अखाड़ा और उसके संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि जी हमारे लिए सम्माननीय है। अखाड़े के गठन के पहले से ही उनसे संपर्करहा है। ऐसे में अखाड़े से जुड़े अनेक मुद्दों पर उनसे लगातार बातचीत होती रही है। लेकिन, इसका यह अर्थ कतई नहीं लगाया जाना चाहिए कि किन्नर अखाड़ा, अपना अस्तित्व समाप्त करते हुए उससे विलय कर रहा है।
उन्होंने दो टूक कहा, अखाड़े की अपनी कुछ शर्ते हैं। किन्नर अखाड़े के साथ ‘अखाड़ा’ शब्द जुड़ा ही रहेगा। साथ ही आचार्य से लेकर अन्य सभी महामंडलेश्वरों के पद भी यथावत रहेंगे। फिर एक अखाड़े में स्वतंत्र अस्तित्व के साथ किसी दूसरे अखाड़े के जुड़ने का औचित्य नहीं है। यदि ‘अखाड़ा’ शब्द को अलग करना ही होता तो फिर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से मतभेद ही नहीं रहता। अब तो सिर्फ संगम में ही विलय होगा, किसी अखाड़े में नहीं।6
विज्ञापन
विज्ञापन
‘अमर उजाला‘ से बातचीत में किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर आचार्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने पंचदशनाम जूना अखाड़े में किन्नर अखाड़े के विलय की अटकलों पर पूर्णत: विराम लगा दिया। कहा, पंचदशनाम जूना अखाड़ा और उसके संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि जी हमारे लिए सम्माननीय है। अखाड़े के गठन के पहले से ही उनसे संपर्करहा है। ऐसे में अखाड़े से जुड़े अनेक मुद्दों पर उनसे लगातार बातचीत होती रही है। लेकिन, इसका यह अर्थ कतई नहीं लगाया जाना चाहिए कि किन्नर अखाड़ा, अपना अस्तित्व समाप्त करते हुए उससे विलय कर रहा है।
विज्ञापन
उन्होंने दो टूक कहा, अखाड़े की अपनी कुछ शर्ते हैं। किन्नर अखाड़े के साथ ‘अखाड़ा’ शब्द जुड़ा ही रहेगा। साथ ही आचार्य से लेकर अन्य सभी महामंडलेश्वरों के पद भी यथावत रहेंगे। फिर एक अखाड़े में स्वतंत्र अस्तित्व के साथ किसी दूसरे अखाड़े के जुड़ने का औचित्य नहीं है। यदि ‘अखाड़ा’ शब्द को अलग करना ही होता तो फिर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से मतभेद ही नहीं रहता। अब तो सिर्फ संगम में ही विलय होगा, किसी अखाड़े में नहीं।6
विज्ञापन