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Prayagraj : अब किसके लिए जिएं, भगवान ने एक साथ सुहाग और इकलौती बेटी को छीन लिया

Wed, 10 Sep 2025 06:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 10 Sep 2025 06:14 PM IST
सार

नैनी लेप्रोसी चौराहे के पास मंगलवार दोपहर हुए ट्रक हादसे ने करेली क्षेत्र के करोलबाग लाल कॉलोनी के रत्नेश श्रीवास्तव और उनकी बेटी यशी उर्फ सुहानी की जान ले ली।

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Now for whom should I live, God took away my husband and my only daughter together
रत्नेश श्रीवास्तव और यशी श्रीवास्तव। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

नैनी लेप्रोसी चौराहे के पास मंगलवार दोपहर हुए ट्रक हादसे ने करेली क्षेत्र के करोलबाग लाल कॉलोनी के रत्नेश श्रीवास्तव और उनकी बेटी यशी उर्फ सुहानी की जान ले ली। हादसे की खबर मिलते ही उनकी पत्नी साधना, बेटे हर्ष, भतीजे यशार्थ श्रीवास्तव समेत परिवारीजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। वहां साधना बार‑बार एक ही सवाल पूछती रहीं, भैया, भगवान है?..भैया, भगवान है जब कोई उत्तर नहीं देता, तो खुद ही कहतीं – भगवान नहीं हैं, कोई भगवान नहीं हैं पत्थर हैं पत्थर।

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रत्नेश की पत्नी साधना श्रीवास्तव झलवा स्थित विष्णु भगवान स्कूल में पढ़ाती हैं। घटना के समय वह स्कूल में ही थीं। पति और बेटी की खबर सुनते ही वह बदहवास हालत में पोस्टमार्टम हाउस पहुंची। रोते हुए बताया कि कल ही रत्नेश ने कहा था, हम जिंदगी भर तुम्हारे साथ रहेंगे, लेकिन आज दोनों की लाशें सामने थीं। उन्होंने कहा, मैं रोज भगवान का श्रृंगार करती थी, सबकी भलाई सोचती थी, फिर भी भगवान ने हमें अकेला छोड़ दिया। हमने क्या किसी का बिगाड़ा था?
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कुछ देर बाद परिवार की एक महिला उन्हें समझाने लगीं, लेकिन साधना ने आंसू पोंछते हुए कहा, देखो मैं नहीं रो रही हूं। मेरे पति और बेटी मुझे छोड़कर नहीं गए, हमारे साथ हैं। फिर उनकी आवाज भर्रा गई और बेटे हर्ष पुकारते हुए बोलीं मैं अकेली कैसे संभालूंगी…आप ऐसे मुझे छोड़कर नहीं जा सकते। यह कहते ही वहां मौजूद परिवार के लोग फफक पड़े। साधना की पीड़ा यहीं नहीं थमी। उन्होंने बेटी को याद करते हुए कहा, सुहानी भी गई। भगवान नहीं हैं, मंदिर से सब भगवान को फेंक दो। हम अपने पति के साथ आएंगे। कहा, कल ही मैंने भगवान का व्रत रखा था और पति ने चार साड़ियां खरीदी थीं। अब उन्हीं साड़ियों के साथ हमें भी गंगा में बहा दीजिए।
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बेटी तो लड्डू गोपाल को हर रोज सजाती थी, फिर क्यों भगवान ने उसकी जिंदगी छीन ली। साधना, परिवार की एक महिला से लिपटकर रोते हुए कहा कि उनकी बेटी यशी, जो अभी जीवन की शुरुआत ही कर रही थी, ठाकुर जी के लिए पालकी, कपड़े, खिलौने खरीदती थी, भगवान ने उसकी जिंदगी भी छीन ली। अभी तो उसने दुनिया देखी भी नहीं थी। पति-बेटी के लिए साधना को बिलखते के इस दृश्य ने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर मौजूद हर व्यक्ति के दिल को झकझोरकर रख दिया।

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