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सरकारी अस्पतालों के भरोसे न पड़ें बीमार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Aug 2016 02:01 AM IST
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अस्पताल
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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बारिश के मौसम में जरा संभलकर रहिए। बीमार पड़ेंगे तो बेड मिलना मुश्किल हो जाएगा। मंडल के सबसे बड़े अस्पताल स्वरूपरानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय, चिल्ड्रेन अस्पताल, बेली, कॉल्विन की आईसीयू और इमरजेंसी में जगह नहीं मिलेगी। अस्पतालों में वायरल, बैक्टीरिया आदि से पीड़ित मरीजों की भीड़ लगी हुई है। रोजाना 50 से अधिक लोग भर्ती हो रहे हैं। आईसीयू, इमरजेंसी में मरीजों को जरा सी राहत मिल रही है तो उन्हें तुरंत वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। मरीजों को ज्यादा परेशानी चिल्ड्रेन और एसआरएन में हैं।
सरकारी अस्पतालों की ऐसी हालत एक हफ्ते से हुई है। एसआरएन के 36 बेड के आईसीयू में रोजाना दो दर्जन से अधिक मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर डायरिया, फीवर, दिमागी बुखार, सीओपीडी जैसी बीमारियों के मरीज हैं। एसआरएन अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डॉ. मनोज माथुर कहते हैं कि आईसीयू भरा है। नए मरीजों को भर्ती करना मुश्किल हो रहा है, जो मरीज आईसीयू में पहले से भर्ती हैं उन्हें जरा सा आराम मिल रहा है तो तुरंत ही दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। उधर, चिल्ड्रेन अस्पताल में भी ऐसी हालत बनी हुई है। छोटे बच्चे होने से वहां पर एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
अस्पताल की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभा कहती हैं भर्ती होने वालों ज्यादातर बच्चे डायरिया, बुखार, मेनिनजाइटिस की चपेट में हैं। चिल्ड्रेन अस्पताल में बृहस्पतिवार को दिन में 16 बच्चों को भर्ती किया गया। उधर, कॉल्विन अस्पताल के डॉ. इम्तियाज ने बताया कि बृहस्पतिवार को 10 से अधिक बुखार, डायरिया के मरीजों को भर्ती किया गया। ऐसा ही हाल बेली का भी है। मौसम के उठापटक होने से सांस के मरीजों पर भी आफत आई है। तेलियरगंज स्थित टीबी अस्पताल में भी रोजाना तीन-चार मरीज गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं। लगातार मरीजों के पहुंचने से सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है। नए मरीजों को बेड मिलना मुश्किल हो रहा है।
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मंडल में डेंगू ने एक व्यक्ति की जान ले ली है, लेकिन इसके उपचार और रोकथाम के लिए अभी तक मुकम्मल व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की है। इलाहाबाद समेत चारों जिलों का हाल बुरा है। डीएम के निर्देश पर संक्रामक रोगों से निपटने के लिए टीम का गठन और बेली, कॉल्विन में बेड आरक्षित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सारी व्यवस्थाएं कागजों पर हैं। डेंगू के नाम पर दोनों ही अस्पतालों में पहले से ही वार्ड आरक्षित रखा जाता है। इसके जांच की सुविधा भी बंद है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग को अभी होश नहीं आया है। डेंगू की जांच मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में होती है।
यहां पर शहर के निजी अस्पतालों से डेंगू की जांच के लिए मरीज भेजे जाते हैं, लेकिन मशीन खराब होने से जांच बंद है। विभाग की ओर से इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना भेजी जा चुकी है, लेकिन उसे अब तक ठीक नहीं कराया गया है। मच्छरों को मारने के लिए अभी तक न तो एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है और न ही कोई जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, जबकि मंडल के चारों जिलों में संक्रामक रोग इकाई के साथ मलेरिया विभाग काम कर रहा है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आलोक रंजन कहते हैं कि उन्होंने डेंगू की मौत को देखते हुए सभी सीएमओ को निर्देशित किया है, लेकिन जिलों के हालत बदतर हैं।
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सरकारी अस्पतालों की ऐसी हालत एक हफ्ते से हुई है। एसआरएन के 36 बेड के आईसीयू में रोजाना दो दर्जन से अधिक मरीज गंभीर हालत में पहुंच रहे हैं। इनमें ज्यादातर डायरिया, फीवर, दिमागी बुखार, सीओपीडी जैसी बीमारियों के मरीज हैं। एसआरएन अस्पताल में मेडिसिन विभाग के डॉ. मनोज माथुर कहते हैं कि आईसीयू भरा है। नए मरीजों को भर्ती करना मुश्किल हो रहा है, जो मरीज आईसीयू में पहले से भर्ती हैं उन्हें जरा सा आराम मिल रहा है तो तुरंत ही दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा है। उधर, चिल्ड्रेन अस्पताल में भी ऐसी हालत बनी हुई है। छोटे बच्चे होने से वहां पर एक-एक बेड पर दो-दो बच्चों का उपचार किया जा रहा है।
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अस्पताल की विभागाध्यक्ष डॉ. अनुभा कहती हैं भर्ती होने वालों ज्यादातर बच्चे डायरिया, बुखार, मेनिनजाइटिस की चपेट में हैं। चिल्ड्रेन अस्पताल में बृहस्पतिवार को दिन में 16 बच्चों को भर्ती किया गया। उधर, कॉल्विन अस्पताल के डॉ. इम्तियाज ने बताया कि बृहस्पतिवार को 10 से अधिक बुखार, डायरिया के मरीजों को भर्ती किया गया। ऐसा ही हाल बेली का भी है। मौसम के उठापटक होने से सांस के मरीजों पर भी आफत आई है। तेलियरगंज स्थित टीबी अस्पताल में भी रोजाना तीन-चार मरीज गंभीर हालत में भर्ती हो रहे हैं। लगातार मरीजों के पहुंचने से सरकारी अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई है। नए मरीजों को बेड मिलना मुश्किल हो रहा है।
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मंडल में डेंगू ने एक व्यक्ति की जान ले ली है, लेकिन इसके उपचार और रोकथाम के लिए अभी तक मुकम्मल व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग ने नहीं की है। इलाहाबाद समेत चारों जिलों का हाल बुरा है। डीएम के निर्देश पर संक्रामक रोगों से निपटने के लिए टीम का गठन और बेली, कॉल्विन में बेड आरक्षित करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सारी व्यवस्थाएं कागजों पर हैं। डेंगू के नाम पर दोनों ही अस्पतालों में पहले से ही वार्ड आरक्षित रखा जाता है। इसके जांच की सुविधा भी बंद है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग को अभी होश नहीं आया है। डेंगू की जांच मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में होती है।
यहां पर शहर के निजी अस्पतालों से डेंगू की जांच के लिए मरीज भेजे जाते हैं, लेकिन मशीन खराब होने से जांच बंद है। विभाग की ओर से इस संबंध में मेडिकल कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना भेजी जा चुकी है, लेकिन उसे अब तक ठीक नहीं कराया गया है। मच्छरों को मारने के लिए अभी तक न तो एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा रहा है और न ही कोई जागरूकता अभियान शुरू किया गया है, जबकि मंडल के चारों जिलों में संक्रामक रोग इकाई के साथ मलेरिया विभाग काम कर रहा है। अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. आलोक रंजन कहते हैं कि उन्होंने डेंगू की मौत को देखते हुए सभी सीएमओ को निर्देशित किया है, लेकिन जिलों के हालत बदतर हैं।