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मौके पर न सही, पर कागज में चाहिए जमीन
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Jan 2015 01:52 AM IST
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इलाहाबाद। माघ मेला बीतने लगा है और अब नए खेल की शुरुआत होने लगी है। मेले में संस्थाओं के लिए अब जमीन नहीं बची है। इसके बावजूद तमाम संस्थाओं के प्रतिनिधि भूमि आवंटन के लिए मेला प्रशासन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। दरअसल, यह अगले में जमीन का इंतजाम करने की कवायद है। इस बार मौके पर भले ही जमीन न मिले लेकिन कागज पर ही आवंटित हो गई तो अगले मेले में जमीन के लिए संस्थाओं का दावा पुख्ता हो जाएगा।
नियम है कि जिस संस्था को मेले में एक बार जमीन और सुविधा आवंटित हो गई, वह संस्थ हर साल मेले में कम से कम उतनी जमीन और सुविधा के लिए दावेदार हो जाती है। मेले में हर साल सांस्थाओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में आवेदन के हिसाब से जमीन कम पड़ने लगी है। इस बार भी दो सौ से अधिक संस्थाओं को खाली हाथ लौट दिया गया। जमीन कम होेने की बात कहकर अफसरों ने आवंटन से इनकार कर दिया। आधा मेला बीतने वाला है और अब नई संस्थाओं को मेले में जमीन मिलने की कोई गुंजाइश भी नहीं है।
प्रशासन के अफसर भी जानते हैं कि जमीन आवंटित की तो संस्था को कहीं न कहीं बसाना होगा और उनके लिए सुविधाओं का इंतजाम भी करना होगा जबकि बजट सीमित है और मेला उसी बजट में संपन्न कराना है। इन सबके बीच नया खेल शुरू हो गया है। मेला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि जिन संस्थाओं को जमीन नहीं मिली, उनके प्रतिनिधि मेला प्रशासन के ही कुछ कर्मचारियों से साठगांठ कर भूमि आवंटन कराने की कोशिश में हैं। संस्थाएं इस प्रयास में भी है कि सुविधा भले ही न मिले लेकिन आवंटन हो जाए ताकि अगले मेले में जमीन और सुविधा के लिए उनका दावा पुख्ता हो जाएगा।
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नियम है कि जिस संस्था को मेले में एक बार जमीन और सुविधा आवंटित हो गई, वह संस्थ हर साल मेले में कम से कम उतनी जमीन और सुविधा के लिए दावेदार हो जाती है। मेले में हर साल सांस्थाओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में आवेदन के हिसाब से जमीन कम पड़ने लगी है। इस बार भी दो सौ से अधिक संस्थाओं को खाली हाथ लौट दिया गया। जमीन कम होेने की बात कहकर अफसरों ने आवंटन से इनकार कर दिया। आधा मेला बीतने वाला है और अब नई संस्थाओं को मेले में जमीन मिलने की कोई गुंजाइश भी नहीं है।
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प्रशासन के अफसर भी जानते हैं कि जमीन आवंटित की तो संस्था को कहीं न कहीं बसाना होगा और उनके लिए सुविधाओं का इंतजाम भी करना होगा जबकि बजट सीमित है और मेला उसी बजट में संपन्न कराना है। इन सबके बीच नया खेल शुरू हो गया है। मेला प्रशासन के सूत्रों ने बताया कि जिन संस्थाओं को जमीन नहीं मिली, उनके प्रतिनिधि मेला प्रशासन के ही कुछ कर्मचारियों से साठगांठ कर भूमि आवंटन कराने की कोशिश में हैं। संस्थाएं इस प्रयास में भी है कि सुविधा भले ही न मिले लेकिन आवंटन हो जाए ताकि अगले मेले में जमीन और सुविधा के लिए उनका दावा पुख्ता हो जाएगा।
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