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डॉक्टर बनने के सपने को निजी कालेजाें का झटका
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Mon, 12 Sep 2016 02:01 AM IST
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डाक्टर
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद। प्रदेश के निजी मेडिकल कालेजों की मनमानी ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं के डॉक्टर बनने के सपने को तोड़ दिया है। कालेजाें ने कम फीस वाली सीटों पर दाखिला लेने से मना कर दिया है। प्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत सीट पर सरकारी फीस लेने का आदेश दिया है, लेकिन निजी कालेज इसके तैयार नहीं हैं। वे एमबीबीएस और बीडीएस की सीटों पर अधिक फीस वसूल रहे हैं। इससे निराश और नाराज छात्राें ने चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक से शिकायत की है। निदेशालय ने भी अभ्यर्थियों की इस शिकायत को गंभीरता से लिया है।
नीट काउंसलिंग शुरू होते ही शासन ने प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों की 50 फीसदी सीट पर सरकारी शुल्क लिए जाने का आदेश जारी कर दिया। यानी, निजी कॉलेजों को इन पर 36 हजार रुपये लेकर ही फीस लेनी है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे। छात्रों से नौ से 12 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। इसे लेकर छात्रों में रोष है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज बेवजह का कारण बता उन्हें परेशान कर रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों ने तो यहां तक कह दिया कि महानिदेशक के यहां से अभी छात्रों के काउंसलिंग की सूची नहीं आई है। छात्र कपिल देव मिश्र का कहना है कि काउंसलिंग के बाद उसे लखनऊ के कालेज में सरकारी फीस वाली सीट एलाट हुई है, लेकिन वहां उससेे नौ लाख रुपये मांगे गए। कपिल ने महानिदेशक से इसकी शिकायत की है। कई अन्य छात्रों ने भी महानिदेशक से इसकी लिखित शिकायत की है।
प्रदेश में 47 प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों ंमें एमबीबीएस की 3100 और बीडीएस की 2300 सीटें हैं। चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी का कहना है कि कालेजों को शासन के आदेश के अनुसार ही प्रवेश लेने होंगे। अधिक फीस वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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नीट काउंसलिंग शुरू होते ही शासन ने प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों की 50 फीसदी सीट पर सरकारी शुल्क लिए जाने का आदेश जारी कर दिया। यानी, निजी कॉलेजों को इन पर 36 हजार रुपये लेकर ही फीस लेनी है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहे। छात्रों से नौ से 12 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। इसे लेकर छात्रों में रोष है। छात्रों का कहना है कि कॉलेज बेवजह का कारण बता उन्हें परेशान कर रहे हैं। कई मेडिकल कॉलेजों ने तो यहां तक कह दिया कि महानिदेशक के यहां से अभी छात्रों के काउंसलिंग की सूची नहीं आई है। छात्र कपिल देव मिश्र का कहना है कि काउंसलिंग के बाद उसे लखनऊ के कालेज में सरकारी फीस वाली सीट एलाट हुई है, लेकिन वहां उससेे नौ लाख रुपये मांगे गए। कपिल ने महानिदेशक से इसकी शिकायत की है। कई अन्य छात्रों ने भी महानिदेशक से इसकी लिखित शिकायत की है।
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प्रदेश में 47 प्राईवेट मेडिकल कॉलेजों ंमें एमबीबीएस की 3100 और बीडीएस की 2300 सीटें हैं। चिकित्सा शिक्षा के महानिदेशक डॉ. बीएन त्रिपाठी का कहना है कि कालेजों को शासन के आदेश के अनुसार ही प्रवेश लेने होंगे। अधिक फीस वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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