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उपयोग नहीं की जा रही अधिकृत भूमि वापस पाने का अधिकार नहीं -हाईकोर्ट
Wed, 30 Jun 2021 08:08 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 30 Jun 2021 08:08 PM IST
सार
- अवैध लाभ को समानता का मूल अधिकार नहीं मान सकते , याचिका खारिज
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allahabad high court
- फोटो : social media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीन का कब्जा ले लिया गया हो,भले ही उसे उपोयग में न लिया जा रहा हो, तब भी भू स्वामी उस जमीन को वापस मांगने का हकदार नहीं है। सरकार चाहे तो अधिगृहीत जमीन का अधिग्रहण रद्द कर सकती है और जिलाधिकारी इस कार्यवाही में किसान को हुए नुकसान की भरपाई करेगा। कोर्ट ने दशकों पहले अधिगृहीत की गई जमीन को खेती के लिए वापस करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज कर दी है ।
कोर्ट ने कहा याची यह मांग नहीं कर सकता कि कुछ लोगों की जमीन वापस की गई है इसलिए उसे भी वापस की जाए। क्योंकि गलत या अवैध तरीके से अगर किसी को लाभ मिला है तो इसे अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता का अधिकार से नहीं जोड़ा जा सकता है।
यह आदेश तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजय यादव तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने विजय पाल व 4अन्य की याचिका पर दिया है। याची की गौतमबुद्धनगर, दादरी के थापखेरा गांव की जमीन का दशकों पहले अधिग्रहण किया गया।याची की आपत्ति अस्वीकार कर दी गई। उसका कहना था कि वह जाटव जाति का किसान है। इस जमीन के अलावा उसके पास दूसरी जमीन नहीं है। कुछ लोगों को उनकी जमींन वापस की गई है । उसकी भी वापस की जाए।
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कोर्ट ने कहा कि याचिका काफी विलंब से दाखिल की गई है। इसी आधार पर याचिका खारिज होने योग्य है और किसी को गलत आदेश से जमीन वापस की गई है तो उस गलती का लाभ नहीं मांगा जा सकता। अधिगृहीत जमीन पर कब्जा लेने के बाद उसकी वापसी नहीं की जा सकती।
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कोर्ट ने कहा याची यह मांग नहीं कर सकता कि कुछ लोगों की जमीन वापस की गई है इसलिए उसे भी वापस की जाए। क्योंकि गलत या अवैध तरीके से अगर किसी को लाभ मिला है तो इसे अनुच्छेद 14 के अंतर्गत समानता का अधिकार से नहीं जोड़ा जा सकता है।
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यह आदेश तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजय यादव तथा न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ ने विजय पाल व 4अन्य की याचिका पर दिया है। याची की गौतमबुद्धनगर, दादरी के थापखेरा गांव की जमीन का दशकों पहले अधिग्रहण किया गया।याची की आपत्ति अस्वीकार कर दी गई। उसका कहना था कि वह जाटव जाति का किसान है। इस जमीन के अलावा उसके पास दूसरी जमीन नहीं है। कुछ लोगों को उनकी जमींन वापस की गई है । उसकी भी वापस की जाए।
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कोर्ट ने कहा कि याचिका काफी विलंब से दाखिल की गई है। इसी आधार पर याचिका खारिज होने योग्य है और किसी को गलत आदेश से जमीन वापस की गई है तो उस गलती का लाभ नहीं मांगा जा सकता। अधिगृहीत जमीन पर कब्जा लेने के बाद उसकी वापसी नहीं की जा सकती।