फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   No matter how deep the suspicion, it cannot substitute for legal evidence: Court.

संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, कानूनी साक्ष्य का विकल्प नहीं बन सकता : कोर्ट

Sat, 10 Oct 2026 02:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज Updated Sat, 10 Oct 2026 02:52 AM IST
विज्ञापन
No matter how deep the suspicion, it cannot substitute for legal evidence: Court.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने करीब 41 साल पुराने हत्या और डकैती के प्रयास से जुड़े मामले की सुनवाई में विवेचना पर हैरानी जताई। कहा कि घटनास्थल के आंगन में दरवाजे के पास खून मिला था। जबकि, मृतक का शव चारपाई पर पाया गया। इसके बावजूद विवेचक ने यह पता लगाने की कोशिश ही नहीं की कि घायल को चारपाई तक कैसे और किन परिस्थितियों में लाया गया।
विज्ञापन

इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की एकल पीठ ने जगनायक सिंह और संतोष की अपील स्वीकार कर ली। साथ ही उन्हें मिली सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि संदेह कितना भी गहरा क्यों न हो, वह कानूनी साक्ष्य का विकल्प नहीं बन सकता। मामला बांदा जिले के पैलानी थाना क्षेत्र के अलीना गांव का है। अभियोजन के अनुसार, 27 सितंबर 1983 की रात दीनदयाल की घर में घुसकर हत्या कर दी गई थी। उनकी पत्नी धुरिया भी घायल हुई थीं। आरोप था कि जगनायक सिंह तमंचा, संतोष फारसा और रामराज लाठी लेकर घर में घुसे थे। लूटपाट के प्रयास का विरोध करने पर दीनदयाल की हत्या कर दी गई।बांदा के विशेष न्यायाधीश ने 25 जनवरी 1985 को तीनों को घर में घुस कर हत्या करने का दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ तीनों ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की।
विज्ञापन

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed