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निठारी कांड : CBI नहीं बता पाई... क्यों नहीं बनी कोली की फर्द गिरफ्तारी

Wed, 12 Jul 2023 06:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Jul 2023 06:25 PM IST
सार

नोएडा के सनसनीखेज निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा के खिलाफ उसकी अपील पर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएचए रिजवी की पीठ रोजाना सुनवाई कर रही है। चार दिन कोली के वकील ने अपनी दलीलें रखीं। मंगलवार को सीबीआई की बारी आई।

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Nithari case: CBI lawyer starts argument on Koli's appeal against hanging in Allahabad High Court
आरोपी सुरेंद्र कोली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट में निठारी कांड की नियमित सुनवाई के पांचवें दिन सीबीआई के वकील ने सुरेंद्र कोली की गिरफ्तारी से लेकर बरामदगी तक की कहानी प्रस्तुत की।वकील ने बताया कि 29 दिसंबर 2006 की सुबह कोली की गिरफ्तारी हुई और रात 11 बजे थाने की जनरल डायरी (जीडी) में इसे दर्ज किया गया। कोली के इकबालिया बयान के आधार पर नरकंकाल बरामद किए गए। हालांकि, सीबीआई इसका जवाब नहीं दे पाई कि पुलिस ने मौके पर फर्द बरामदगी और फर्द गिरफ्तारी क्यों नहीं बनाई।

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नोएडा के सनसनीखेज निठारी कांड में सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा के खिलाफ उसकी अपील पर हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएचए रिजवी की पीठ रोजाना सुनवाई कर रही है। चार दिन कोली के वकील ने अपनी दलीलें रखीं। मंगलवार को सीबीआई की बारी आई। सीबीआई के वकील ने दावा किया कि कोली को पुलिस ने 29 दिसंबर की सुबह नोएडा के सेक्टर-31 से उस समय गिरफ्तार किया था, जब वह रिक्शे से कूद कर भागने की कोशिश कर रहा था।

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बकौल सीबीआई, कोली ने उसी दिन पुलिस के समक्ष जुर्म का इकबाल किया और नरकंकालों की बरामदगी भी कराई। इसका ब्योरा थाने की जनरल डायरी (जीडी) में रात 11 बजे दर्ज किया गया। कोर्ट के पूछने पर सीबीआई के वकील ने बताया कि जीडी के अलावा मौके पर अलग से कोई फर्द गिरफ्तारी नहीं बनाई गई थी। गिरफ्तारी की सूचना रात को ही कोली के उत्तराखंड में रह रहे परिजनों को दी गई थी। हालांकि, सीबीआई परिजनों को सूचना देने का कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं कर पाई।

इसके पहले, कोली के वकील ने दावा किया था कि गांव से बुला कर 27 दिसंबर को ही पुलिस ने कोली को हिरासत में ले लिया था। 29 दिसंबर को पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की, बल्कि नाटकीय घटनाक्रम जीडी पर दर्ज किया है। कोली को इकबालिया बयान अमानवीय यातानाएं देकर पुलिस द्वारा रटवाया गया था, जो कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा डीके बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के वाद में गिरफ्तारी के समय अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और गिरफ्तार व्यक्ति के अधिकारों पर दिए गए दिशा निर्देशों को स्पष्ट उल्लघंन है।

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