प्रयागराज : गंगा नदी में प्रदूषण की तथ्यात्मक स्थिति जानने के लिए एनजीटी ने गठित किया पैनल
याचिका के अनुसार, इस साल 8 मार्च तक प्रयागराज में ''माघ मेला'' आयोजित किया जा रहा है, लेकिन रसूलाबाद इलाके से संगम (गंगा और यमुना) तक (लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में) लगभग 50 नाले प्रदूषित पानी छोड़ रहे हैं।
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माघ मेले के दौरान गंगा नदी में प्रदूषित पानी छोड़े जाने का दावा करने वाली एक याचिका के संबंध में तथ्यात्मक स्थिति जानने और उपचारात्मक कार्रवाई करने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक पैनल गठित किया। पैनल में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के सदस्य सचिव और प्रयागराज के जिला मजिस्ट्रेट शामिल होंगे। पैनल को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत के लिए दो महीने का समय दिया गया है। ये आदेश 18 जनवरी को पारित किया गया था।
याचिका के अनुसार, इस साल 8 मार्च तक प्रयागराज में ''माघ मेला'' आयोजित किया जा रहा है, लेकिन रसूलाबाद इलाके से संगम (गंगा और यमुना) तक (लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में) लगभग 50 नाले प्रदूषित पानी छोड़ रहे हैं।
इसमें यह भी दावा किया गया कि लगभग 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, प्रदूषण के कारण नदी का रंग काला हो गया है। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि याचिका में पर्यावरण मानदंडों के अनुपालन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया है। पीठ में न्यायिक सदस्य जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद भी शामिल हैं।