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सहमी महिलाओं ने बैग में पैक किए गहने-पैसे
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 25 Apr 2015 11:53 PM IST
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शनिवार दोपहर आए भूकंप से दहशत का आलम यह रहा कि घबराए लोग घरों से निकले तो बहुत सी महिलाओं ने अनहोनी की आशंका के चलते बैग में गहने, पैसे, कपड़े पैक कर लिए। पहले और दूसरे झटके बाद तो तमाम महिलाएं घर के बाहर सड़क पर या पार्क में अपने बच्चों की उंगली के साथ ही बैग थामे दिखीं। दोपहर बाद जब भूकंप का डर कुछ कम हुआ तभी बहुत समझाने पर वे बैग लेकर घर के भीतर गईं।
दोपहर करीब पौने बारह बजे भूकंप का पहला झटका आया तो खलबली मची और लोग घरों के बाहर निकल गए। कुछ देर बाद ज्यादातर लोग घरों मे चले गए मगर आधे घंटे बाद ही दुबारा कंपन हुआ तो दहशत बढ़ गई। परिवार के लोग घर या अपार्टमेंट से बाहर भागे लेकिन तमाम परिवारों की महिलाएं अनिष्ट की आशंका से घबराकर अपने और बच्चों के कपड़े, गहने, पैसे पैक करने लगीं।
सुलेमसराय में रहने वाले व्यापारी रमेश कुमार की पत्नी शिखा ने बताया कि उन्होंने एक बैग में खाने-पीने के सामान भी रख लिए थे कि कहीं ऐसा न हो कि तबाही मचे तो दुकानें बंद हो जाएं। उनकी देखादेखी मुहल्ले की कई महिलाओं ने ऐसी तैयारी कर ली थी। भूकंप के बाद सुरक्षा के लिहाज से पार्कों में जुटे बहुत से लोगों के पास ऐसे बैग दिखे जिसमें जरूरत के सामान थे। उनके चेहरे पर भविष्य को लेकर आशंकाएं दिख रही थीं। हालांकि गनीमत रही कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
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दोपहर करीब पौने बारह बजे भूकंप का पहला झटका आया तो खलबली मची और लोग घरों के बाहर निकल गए। कुछ देर बाद ज्यादातर लोग घरों मे चले गए मगर आधे घंटे बाद ही दुबारा कंपन हुआ तो दहशत बढ़ गई। परिवार के लोग घर या अपार्टमेंट से बाहर भागे लेकिन तमाम परिवारों की महिलाएं अनिष्ट की आशंका से घबराकर अपने और बच्चों के कपड़े, गहने, पैसे पैक करने लगीं।
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सुलेमसराय में रहने वाले व्यापारी रमेश कुमार की पत्नी शिखा ने बताया कि उन्होंने एक बैग में खाने-पीने के सामान भी रख लिए थे कि कहीं ऐसा न हो कि तबाही मचे तो दुकानें बंद हो जाएं। उनकी देखादेखी मुहल्ले की कई महिलाओं ने ऐसी तैयारी कर ली थी। भूकंप के बाद सुरक्षा के लिहाज से पार्कों में जुटे बहुत से लोगों के पास ऐसे बैग दिखे जिसमें जरूरत के सामान थे। उनके चेहरे पर भविष्य को लेकर आशंकाएं दिख रही थीं। हालांकि गनीमत रही कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
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