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IFFCO : किसानों की किस्मत चमकाएगी नैनो यूरिया, प्रयागराज में देश का दूसरा प्लांट तैयार

Sun, 25 Sep 2022 05:11 AM IST
विनोद सिंह रामनरेश यादव, प्रयागराज
रामनरेश यादव, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Sep 2022 05:11 AM IST
सार

फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए यूरिया के  सर्वाधिक इस्तेमाल से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होने की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं। इस चिंता को दूर करने के लिए के लिए इफको ने न सिर्फ नैनो फर्टिलाइजर लिक्विड तैयार किया, बल्कि इसका पेटेंट भी करा लिया है।

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Nano Urea will brighten the fortunes of farmers country's second plant ready in Prayagraj
Prayagraj News : नैनो यूरिया का छिड़काव करता किसान। - फोटो : social media

विस्तार

किसानों की किस्मत चमकाने वाली लिक्विड नैनो फर्टिलाइजर का नवंबर से उत्पादन आरंभ हो जाएगा। यह खाद मौजूदा यूरिया के अत्यधिक इस्तेमाल से नष्ट होती उर्वराशक्ति बचाने में मदद मिलेगी ही, किसानों का पैसा, परिश्रम और समय भी बचाएगी। देश में इफको का फूलपुर स्थित यह दूसरा प्लांट होगा, जहां तैयार आधा लीटर नैनो खाद की उर्वरक क्षमता यूरिया की 45 किलोग्राम वजनी एक बोरी के बराबर होगी। इसकी आपूर्ति के लिए अर्जेंटीना और ब्राजील ने भी इफको से करार किया है।

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फसलों की पैदावार बढ़ाने के लिए यूरिया के  सर्वाधिक इस्तेमाल से कृषि भूमि की उर्वरा शक्ति नष्ट होने की शिकायतें लंबे समय से आती रही हैं। इस चिंता को दूर करने के लिए के लिए इफको ने न सिर्फ नैनो फर्टिलाइजर लिक्विड तैयार किया, बल्कि इसका पेटेंट भी करा लिया है। इफको प्रबंधन का दावा है कि नैनो फर्टिलाइजर से भूमि की उर्वरा शक्ति ही नहीं, उत्पादन भी बढ़ेगा। 

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लिक्विड नैनो खाद की बोतल मिलेगी 240 रुपये में
किसानों के लिए यह खाद यूरिया से सस्ती होगी। 45 किलो वाली एक बोरी यूरिया जहां 267 रुपये में मिलती है, वहीं इसी जरूरत की पूर्ति वाली आधा लीटर लिक्विड नैनो खाद की बोतल 240 रुपये में ही मिल जाएगी। यही नहीं, सरकारी कोष से किसानों को सब्सिडी के रूप में प्रतिवर्ष दिए जाने वाले 24 हजार करोड़ रुपये भी बचाए जा सकेंगे। फूलपुर यूनिट के हेड संजय कुदेशिया बताते हैं कि प्लांट तैयार हो चुका है। सरकार की मंजूरी मिलते ही उत्पादन आरंभ करेंगे। नवंबर में यह प्लांट चालू होने की उम्मीद है।

प्रतिवर्ष 32 करोड़ बोतल के उत्पादन का है लक्ष्य
इफको की देश में पहली नैनो खाद की इकाई गुजरात स्थित कलोल में लगी थी। इसका शुभारंभ प्रधानमंत्री मोदी ने किया था। दूसरे चरण में आंवला (बरेली) और फूलपुर (प्रयागराज) में इकाइयां स्थापित की गई हैं। फूलपुर प्लांट की उत्पादन क्षमता सात करोड़ और आंवला की क्षमता 11 करोड़ बोतल प्रतिवर्ष है। फूलपुर में नवंबर से अगले वर्ष मार्च के बीच 70 लाख बोतल खाद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। तीनों प्लांटों से इफको ने सालाना 32 करोड़ बोतल नैनो यूरिया के उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जो 1.37 करोड़ मीट्रिक टन सब्सिडी वाले यूरिया की जगह लेगा।

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नैनो खाद के फायदे

  • यूरिया सिर्फ  30 फीसदी ही फसल को दे पाती है लाभ, नैनो यूरिया 80 फीसदी देगी। 
  • यूरिया की अपेक्षा नैनो का खर्च कम है।
  • ड्रोन से भी हो सकेगा नैनो खाद का छिड़काव। 
  • पर्यावरण के भी अनुकूल है नैनो खाद। 
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