{"_id":"689deec210c7ffef0408f45c","slug":"naini-yamuna-bridge-will-turn-160-years-old-on-15th-august-it-was-constructed-at-a-cost-of-rs-44-46-lakh-2025-08-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj : 15 अगस्त को 160 वर्ष का हो जाएगा नैनी यमुना पुल, 44.46 लाख रुपये में हुआ था तैयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj : 15 अगस्त को 160 वर्ष का हो जाएगा नैनी यमुना पुल, 44.46 लाख रुपये में हुआ था तैयार
Thu, 14 Aug 2025 07:42 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 14 Aug 2025 07:42 PM IST
सार
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बना नैनी यमुना पुल शुक्रवार 15 अगस्त को 160 वर्ष को हो जाएगा। 160 वर्ष यह पुराना पुल आज भी पूरी तरह से जवान है। आने वाले समय में रेलवे द्वारा यहां 160 की रफ्तार से ट्रेन चलाने की तैयारी है।
विज्ञापन
प्रयागराज में यमुना पर बना पुरानी नैनी ब्रिज।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
ब्रिटिश हुकूमत के दौरान बना नैनी यमुना पुल शुक्रवार 15 अगस्त को 160 वर्ष को हो जाएगा। 160 वर्ष यह पुराना पुल आज भी पूरी तरह से जवान है। आने वाले समय में रेलवे द्वारा यहां 160 की रफ्तार से ट्रेन चलाने की तैयारी है। इसके लिए यह पुल पिछले दिनों ही फिट घोषित किया जा चुका है। हालांकि रेलवे द्वारा यमुना पर एक और पुल बनाए जाने की तैयारी की जा रही है लेकिन वह तैयारी अभी कागजों में ही है।
विज्ञापन
दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग को जोड़ने वाला नैनी पुल देश के महत्वपूर्ण पुलों में शामिल है। अंग्रेज यह बात बखूबी जानते थे। इस वजह से वर्ष 1855 में ही उन्होंने यमुना पर पुल निर्माण की तैयारी शुरू की। हालांकि 1859 में ही पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसे तैयार होने में कुल छह वर्ष का समय लगा। तब इस पुल की कुल लागत 44.46 लाख रुपये आई। 15 अगस्त 1865 को यह पुल ट्रेन आवागमन के किलए खोला गया। उत्तर मध्य रेलवे के सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी बताते हैं कि नैनी पुल आज भी पूरी तरह मजबूत है। हर रोज इस पुल से तकरीबन 150 ट्रेनों की आवाजाही हो रही है। इस महत्वपूर्ण पुल का रेलवे द्वारा नियमित रखरखाव भी किया जा रहा है।
विज्ञापन
नैनी यमुना पुल से जुड़े दस महत्वपूर्ण तथ्य
- 14 पिलर पर यमुना नदी पर बने नैनी पुल की लंबाई 3150 फीट है।
- तब यमुना के तेज बहाव के कारण पुल के एक पिलर की डिजाइन हाथा पांव जैसी की गई।
- इस पुल के प्रत्येक पिलर की लंबाई 67 फीट एवं चौड़ाई 17 फीट है।
- दो मंजिला ठोस लोहे के इस पुल के ऊपरी हिस्से में रेल एवं निचले हिस्से में होता है सड़क यातायात।
- पुल निर्माण में तकरीबन 30 लाख क्यूबिक ईंट एवं गारा का हुआ था प्रयोग
- इसमें लगाए गए गर्डर का वजन है तकरीबन 4300 टन।
- वर्ष 1913 में इसे डबल लाइन में परिवर्तित किया गया।
- वर्ष 1928-29 में पुराने गर्डरों के स्थान पर लगाए नए गर्डर।
- ब्रिटिश इंजीनियर मिस्टर सिवले की देखरेख में बना है यह पुल।
- देश का पहला पुल जिसके ऊपर बनाई जा चुकी है डाक्यूमेंट्री।