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न मेरा जिस्म कहीं और मेरी जां रख दे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 21 Mar 2016 12:29 AM IST
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मुशायरा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मैत्रेयी संस्था की ओर से रविवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में काव्य संध्या और मुशायरा आयोजित किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं से सभी का दिल जीत लिया। जाने माने गजल गायक महेश अश्क गोरखपुर ने ‘न मेरा जिस्म कहीं और मेरी जां रख दे, मेरा पसीना जहां हैं मुझे वहां रख दें’ पर खूब तालियां बजीं।
घायल गाजीपुरी ने ‘हरेक मोड़ पे ही रहजनों का पहरा है, बशर के जेहन में कातिल का खौफ गहरा है’, दिल उन्नावी ने ‘वतन की खाक तुम्हें खाक में मिलाएगी’, सागर होशियारपुरी के कलाम ‘जो हैं खुद्दार वो कब औरों का अहसान लेते हैं’ और रमाकांत शर्मा भट्ट की ‘आदमी के बस में सब है, पर किसी के बस में नहीं है आदमी’ को खूब पसंद किया गया। इसके साथ ही इरशाद अहमद अंसारी, अशोक स्नेही, आरके श्रीवास्तव, खुर्शीद हसन, रजिया सुल्तान की रचनाओं को भी सराहा गया। कार्यक्रम का संचालन घायल गाजीपुरी और धन्यवाद ज्ञापन संस्था महासचिव धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने दिया।
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घायल गाजीपुरी ने ‘हरेक मोड़ पे ही रहजनों का पहरा है, बशर के जेहन में कातिल का खौफ गहरा है’, दिल उन्नावी ने ‘वतन की खाक तुम्हें खाक में मिलाएगी’, सागर होशियारपुरी के कलाम ‘जो हैं खुद्दार वो कब औरों का अहसान लेते हैं’ और रमाकांत शर्मा भट्ट की ‘आदमी के बस में सब है, पर किसी के बस में नहीं है आदमी’ को खूब पसंद किया गया। इसके साथ ही इरशाद अहमद अंसारी, अशोक स्नेही, आरके श्रीवास्तव, खुर्शीद हसन, रजिया सुल्तान की रचनाओं को भी सराहा गया। कार्यक्रम का संचालन घायल गाजीपुरी और धन्यवाद ज्ञापन संस्था महासचिव धीरेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने दिया।
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