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Prayagraj News: जुझारू छात्र नेताओं में शामिल रहे रोहित के लिए युवाओं को साधना बड़ी चुनौती
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रोहित मिश्रा भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष
- फोटो : Samvad
रोहित मिश्रा यानी वह नाम, जिनके नेतृत्व में हुए प्रभावी छात्र आंदोलन की वजह से इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के कुलपति को इस्तीफा देकर जाना पड़ा। युवाओं के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने वाले रोहित मिश्रा अब प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बनकर नई जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं।
भाजपा युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद रोहित के लिए पहली चुनौती रोजगार और परीक्षाओं के मुद्दे पर युवाओं को साधना है क्योंकि इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन हो रहे हैं। हालांकि, रोहित की गिनती हमेशा जुझारू छात्र नेताओं में होती रही है। 2016-17 में रोहित जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने तो सबसे पहले विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था।
कुलपति के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए रोहित मिश्रा के नेतृत्व में उग्र आंदोलन हुआ था और रोहित का जेल जाना पड़ा था। हालांकि, आंदोलन का प्रभाव रहा कि तत्कालीन कुलपति को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
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विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रोहित की मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में केंद्रीय विश्वविद्यालयों का संयोजक और फिर राष्ट्रीय मंत्री भी बनाया गया।
रोहित वर्तमान में मध्य प्रदेश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रभारी हैं। मूल रूप से प्रतापगढ़ के हर्षपुर कोटवा लालगंज के रहने वाले रोहित ने स्नातक, परास्नातक और शोध इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही किया।
उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि आज से प्रदेश का हर युवा खुद को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष समझे। उनकी प्राथमिकता युवाओं की एक ऐसी मजबूत टीम तैयार करना है जो प्रदेश के युवाओं को जमीनी हकीकत से अवगत करा सके और अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ सके।
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भाजपा युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद रोहित के लिए पहली चुनौती रोजगार और परीक्षाओं के मुद्दे पर युवाओं को साधना है क्योंकि इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन हो रहे हैं। हालांकि, रोहित की गिनती हमेशा जुझारू छात्र नेताओं में होती रही है। 2016-17 में रोहित जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष बने तो सबसे पहले विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था।
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कुलपति के खिलाफ वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए रोहित मिश्रा के नेतृत्व में उग्र आंदोलन हुआ था और रोहित का जेल जाना पड़ा था। हालांकि, आंदोलन का प्रभाव रहा कि तत्कालीन कुलपति को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।
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विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच रोहित की मजबूत पकड़ को देखते हुए उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में केंद्रीय विश्वविद्यालयों का संयोजक और फिर राष्ट्रीय मंत्री भी बनाया गया।
रोहित वर्तमान में मध्य प्रदेश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रभारी हैं। मूल रूप से प्रतापगढ़ के हर्षपुर कोटवा लालगंज के रहने वाले रोहित ने स्नातक, परास्नातक और शोध इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ही किया।
उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि आज से प्रदेश का हर युवा खुद को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष समझे। उनकी प्राथमिकता युवाओं की एक ऐसी मजबूत टीम तैयार करना है जो प्रदेश के युवाओं को जमीनी हकीकत से अवगत करा सके और अधिक से अधिक युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ सके।

रोहित मिश्रा भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष- फोटो : Samvad