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एमएचआरडी को नहीं करना चाहिए था हस्तक्षेप : वीसी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 11 May 2016 02:41 AM IST
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कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू ने ऑफलाइन के मुद्दे पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय के हस्तक्षेप को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विकास में बाधा बताया है। उनका कहना है कि मंत्रालय को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए थे। इसमें पॉलिटिक्स हुई है। इसमें अलग-अलग गुटों के अलावा एमपी, एमएलए, संघ चालक आदि शामिल रहे। इस तरह के बयान के बाद कुलपति के इस्तीफा तथा छह महीने के लिए छुट्टी पर भेजे जाने की भी चर्चा रही, लेकिन उन्होंने इसे बकवास बताया।
कुलपति का कहना है कि चार लोगों ने अनशन शुरू किया। उनकी खुद की परेशानी है, इसलिए अनशन पर बैठे। ज्यादा लोग नहीं थे, लेकिन राजनीति हुई। मुझे बताया गया है कि कुछ गुट हैं। इनका पैसा कमाना मकसद है। वही लोग यूनिवर्सिटी को बरबाद करने पर तुले हैं। चार लोगों के अनशन में भाजपा, कांग्रेस, सपा, एबीवीपी के नेता शामिल हो गए। मंत्रालय ने ही ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा था। अब उसका हस्तक्षेप ठीक नहीं है। इससे विश्वविद्यालय आगे नहीं बढ़ पाएगा। विश्वविद्यालय का पुराना गौरव पाने के लिए जो प्रयास शुरू हुए हैं, उसे धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि अगर गवर्नमेंट चाहे तो किसी भी वक्त इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। सरकार चाहे तो किसी एमपी को कुलपति बना सकती है। यह बयान चैनलों पर चलने के बाद कुलपति के इस्तीफा की चर्चा होने लगी। यह भी चर्चा रही कि कुलपति को छह महीने की छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, कुलपति प्रोफेसर हांगलू ने इन चर्चाओं को बकवास बताया।
कुलपति के इस बयान का विरोध भी शुरू हो गया है। एबीवीपी की बैठक में सदस्यों ने इसे राजनीतिक बयान करार देते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य दिलीप शुक्ला ने कहा कि प्रोफेसर हांगलू पूर्वाग्रह से ग्रसित हैँ तथा इस तरह का बयान देकर वह माहौल खराब करके परिसर को राजनीतिक अखाड़ा बनाना चाहते हैं। बैठक में निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक में शैलेंद्र मौर्य, अश्वनी मौर्य, अजीत उपाध्याय, सूर्य प्रकाश, रिंकू पयासी, जितेंद्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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कुलपति का कहना है कि चार लोगों ने अनशन शुरू किया। उनकी खुद की परेशानी है, इसलिए अनशन पर बैठे। ज्यादा लोग नहीं थे, लेकिन राजनीति हुई। मुझे बताया गया है कि कुछ गुट हैं। इनका पैसा कमाना मकसद है। वही लोग यूनिवर्सिटी को बरबाद करने पर तुले हैं। चार लोगों के अनशन में भाजपा, कांग्रेस, सपा, एबीवीपी के नेता शामिल हो गए। मंत्रालय ने ही ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा था। अब उसका हस्तक्षेप ठीक नहीं है। इससे विश्वविद्यालय आगे नहीं बढ़ पाएगा। विश्वविद्यालय का पुराना गौरव पाने के लिए जो प्रयास शुरू हुए हैं, उसे धक्का लगा है। उन्होंने कहा कि अगर गवर्नमेंट चाहे तो किसी भी वक्त इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। सरकार चाहे तो किसी एमपी को कुलपति बना सकती है। यह बयान चैनलों पर चलने के बाद कुलपति के इस्तीफा की चर्चा होने लगी। यह भी चर्चा रही कि कुलपति को छह महीने की छुट्टी दे दी गई है। हालांकि, कुलपति प्रोफेसर हांगलू ने इन चर्चाओं को बकवास बताया।
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कुलपति के इस बयान का विरोध भी शुरू हो गया है। एबीवीपी की बैठक में सदस्यों ने इसे राजनीतिक बयान करार देते हुए कड़े शब्दों में निंदा की। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य दिलीप शुक्ला ने कहा कि प्रोफेसर हांगलू पूर्वाग्रह से ग्रसित हैँ तथा इस तरह का बयान देकर वह माहौल खराब करके परिसर को राजनीतिक अखाड़ा बनाना चाहते हैं। बैठक में निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। बैठक में शैलेंद्र मौर्य, अश्वनी मौर्य, अजीत उपाध्याय, सूर्य प्रकाश, रिंकू पयासी, जितेंद्र शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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