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मेडिकल कॉलेजों को बैंक गारंटी लेने का अधिकार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:50 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : amar ujala
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हाईकोर्ट ने कहा है कि मेडिकल कॉलेजों को निर्धारित फीस के अलावा किसी भी छात्र से अलग से बैंक गारंटी मांगने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव मेडिकल एजूकेशन एंड ट्रेनिंग को निर्देश दिया कि वह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया से सलाह कर कॉलेजों के लिए एक गाइड लाइन जारी करें तथा बैंक गारंटी मांगने वाले कॉलेजों पर जुर्माना लगाया जाए। कोर्ट ने इस मामले में महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण (डीजीएमईटी) और अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
मेडिकल छात्र से 31 लाख रुपये से अधिक बैंक गारंटी एक घंटे में जमा करने की मांग करने पर कोर्ट ने एक मेडिकल कॉलेज की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश भी दिया है। कॉलेज ने गारंटी न देने पर छात्र को दाखिला देने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दाखिले से वंचित छात्र को कॉलेज पांच लाख रुपये मुआवजे का भुगतान तीन माह के भीतर करे, मगर समयसीमा बीत जाने के कारण कोर्ट ने छात्र को दाखिला देने के लिए आदेश करने से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रमुख सचिव मेडिकल एजूकेशन एंड ट्रेनिंग इन आदेशों के आधार पर मेडिकल कॉलेजोें के लिए गाइड लाइन और आदेश जारी करें। छात्रों की शिकायतों को सुनने और समाधान के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तैनात किया जाए जो अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह होगा।
डॉ. मुक्ताकर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि वह मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्स के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा नीट 2017-18 के लिए सफल हुआ था। याची जब कॉलेज में दाखिले के लिए पहुंचा तो प्रिंसिपल ने उससे 31 लाख 89 हजार 400 रुपये की अतिरिक्त बैंक गारंटी एक घंटे के भीतर जमा करने को कहा।
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मेडिकल छात्र से 31 लाख रुपये से अधिक बैंक गारंटी एक घंटे में जमा करने की मांग करने पर कोर्ट ने एक मेडिकल कॉलेज की जांच कर उचित कार्रवाई करने का आदेश भी दिया है। कॉलेज ने गारंटी न देने पर छात्र को दाखिला देने से मना कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि दाखिले से वंचित छात्र को कॉलेज पांच लाख रुपये मुआवजे का भुगतान तीन माह के भीतर करे, मगर समयसीमा बीत जाने के कारण कोर्ट ने छात्र को दाखिला देने के लिए आदेश करने से मना कर दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि प्रमुख सचिव मेडिकल एजूकेशन एंड ट्रेनिंग इन आदेशों के आधार पर मेडिकल कॉलेजोें के लिए गाइड लाइन और आदेश जारी करें। छात्रों की शिकायतों को सुनने और समाधान के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी तैनात किया जाए जो अपने कार्यों के प्रति जवाबदेह होगा।
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डॉ. मुक्ताकर सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति अजय भनोट की पीठ ने दिया है। याची का कहना था कि वह मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्स के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा नीट 2017-18 के लिए सफल हुआ था। याची जब कॉलेज में दाखिले के लिए पहुंचा तो प्रिंसिपल ने उससे 31 लाख 89 हजार 400 रुपये की अतिरिक्त बैंक गारंटी एक घंटे के भीतर जमा करने को कहा।
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