mauni amavasya 2021: संगम पर उमड़ा आस्था का जन सागर, स्नानार्थियों के स्वागत में हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा (देखें तस्वीरें)
- 30 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के संगम में मौन डुबकी लगाने का मेला प्रशासन का दावा
- 130 सीसीटीवी कैमरों से मेला क्षेत्र पर रखी गई नजर
- 08 घाटों पर मौनी अमावस्या का हुआ स्नान
विस्तार
मौनी अमावस्या पर संगम तट पर भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। आस्था की लहरें कोरोना संक्रमण के डर को बहा ले गईं। न किसी को थकने की चिंता न अपनों से बिछड़ने की फिक्र। कड़ाके की ठंड के बावजूद भक्ति के रंग में रंगे जन सैलाब में हर कोई संगम के रास्ते पर ही बढ़ता रहा। आधी रात से ही संगम समेत माघ मेला क्षेत्र के आठ घाटों पर मौन डुबकी की होड़ मच गई। इस दौरान संगम पर उमड़े श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा से किया गया।
तीर्थराज प्रयागराज में बृहस्पतिवार को श्रवण नक्षत्र में दुर्लभ षष्ठग्रही योग में मौन डुबकी के लिए देश के कोने-कोने से आधी रात को ही भक्ति का कारवां उमड़ने लगा। सिविल लाइंस हो या फिर झूंसी, फाफामऊ, नैनीसे संगम की ओर जाने वाली सड़कें। हर तरफ से अमावस्या स्नान के लिए कहीं हाथों में झंडा निशान लिए समूहबद्ध टोलियां चलती रहीं तो कहीं एक-दूसरे का हाथ थामे लोग बढ़ रहे थे।
सिर पर गठरी, हाथ में झोला और ऊपर से पूरे परिवार को सहेजते हुए बढ़ने की ललक देखते बन रही थी। लाल मार्ग, काली मार्ग और त्रिवेणी मार्ग पर सुबह सात बजे तक तिल रखने भर की जगह नहीं बची। महिलाओं के समूह गंगा मैया के गीत गाते चल रहे थे, तो उन्हीं मार्गों पर संतों की टोलियां ढोल, मंजीरे पर भजन करने में लीन रहीं। घाटों पर मनौतियां मानने वाले बाजे गाजे के साथ डुबकी लगाने पहुंच रहे थे। चाहे स्नान घाट हों या संतों-कल्पवासियों के शिविर। हर तरफ जन ज्वार हिलोरें मारता रहा।
पुण्य की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालुओं के रेला के बीच संगम समेत काली, त्रिवेणी और मोरी मार्गों पर बने स्नान घाट शाम तक पैक रहे।इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुगम यातायात के लिए पूरे मेला क्षेत्र को पैदल पथ में तब्दील कर दिया गया था। इस दौरान पांटूनपुलों के अलावा अन्य मार्गों से वाहनों को संगम क्षेत्र में प्रवेश नहीं दिया गया।
मौनी अमावस्या पर अक्षयवट-सरस्वती कूप में नहीं मिला प्रवेश
मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर भीड़ को देखते हुए बृहस्पतिवार की शाम मूल अक्षयवट और सरस्वती कूप को आम श्रद्धालुओं के लिए नहीं खोला गया। इस वजह से हजारों श्रद्धालुओं को वापस होना पड़ा। इस दौरान किले में स्थिति अन्य देवी-देवताओं के भी दर्शन आम भक्त नहीं कर सके।
मौनी अमावस्या पर उमड़ा जनसैलाब, श्रद्धालुओं पर हुई पुष्प वर्षा
माघ मेेले के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या के मौके पर संगम में जनसैलाब उमड़ गया। कोरोना संक्रमण काल में यह पहला मौका रहा जब प्रयागराज में एक ही स्थान पर इतनी भीड़ जुटी। गंगा मैया के जयकारे के साथ बुधवार की रात से शुरू हुआ मौनी का स्नान गुरुवार को दिन भर जारी रहा। सुबह मौसम साफ रहने से संगम तट पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही।
बुधवार की तरह गुरुवार को भी माघ मेला क्षेत्र में मौनी अमावस्या के स्नान के लिए श्रद्धालुओं का आने का क्रम जारी रहा। अमावस्या तिथि 10 फरवरी बुधवार रात 12.19 बजे लगा जो गुरुवार रात 11.48 बजे तक रहेगा। उधर मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आठ किलोमीटर क्षेत्र में बनाए गए आठ स्नान घाट में लोगों के डुबकी लगाने का सिलसिला जारी रहा। इस दौरान हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा भी मेला क्षेत्र में करवाई गई।