{"_id":"573780bc4f1c1b577991a81a","slug":"many-special-features-to-a-single-joint-family-benefits","type":"story","status":"publish","title_hn":"कई खूबियों में खास है संयुक्त परिवार तो एकल के भी फायदे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कई खूबियों में खास है संयुक्त परिवार तो एकल के भी फायदे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 15 May 2016 01:46 AM IST
विज्ञापन
विश्व परिवार दिवस
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
परिवार चाहे संयुक्त हो या एकल, इसकी खुशियां सदस्यों की सोच और व्यवहार पर ही निर्भर करती हैं। हर परिवार के सकारात्मक और नकारात्मक पक्ष हैं। सुरक्षा की दृष्टि से संयुक्त परिवार की खूबियां है तो सुविधा की दृष्टि से एकल परिवार के भी अपने फायदे हैं। बदलते वक्त और जरूरत के हिसाब से परिवार संयुक्त और एकल परिवार का रूप लेते हैं।
संयुक्त परिवार में अगर घर का मुखियाप्रभावी और संकीर्ण मानसिकता का है तो दिक्कतें स्वाभाविक हैं। एक बात और परिवार में जो सदस्य आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा सशक्त होता है, उसकी भूमिका और परिवार में उसका महत्व भी अलग होता है। महिलाओं के बीच भी यही स्थिति होती है। वहीं एकल परिवार में घर की सारी जिम्मेदारी खुद उठानी होती हैं यानी जितनी दिक्कतें हैं, उसे साझा करने वाला दूसरा कोई नहीं होता है। ऐसे में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं तो बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी समस्या होती है।
साउथ मलाका के रवींद्र मिश्रा के परिवार में 35 सदस्य हैं। रविंद्र कहते हैं, सुरक्षा, और सुविधा, दोनों ही दृष्टियों से संयुक्त परिवार के अपने फायदे हैं। संयुक्त परिवार में अगर कभी किसी को कोई दिक्कत होती हैं तो सभी सहायता के लिए पूरा परिवार ही जुट जाता है। बच्चों को छोड़कर ऑफिस या कहीं बाहर जाना है तो भी निश्चिंतता के साथ जा सकते हैं। यहां बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं बल्कि पूरे परिवार की होती है। बच्चे परिवार के संस्कार भी सीखते हैं।
विज्ञापन
वहीं करेलाबाग कॉलोनी में संयुक्त परिवार में रहने वाली और तीन बहुओं में सबसे छोटी मीनू जायसवाल कहती हैं, संयुक्त परिवार तभी तक अच्छा है जब परिवार के लोग अच्छे हों और सबकी जिम्मेदारियां तय हों। एक साथ रहते हुए भी महिलाओं को अपने हिस्से की आजादी मिले। कई बार सामूहिक फैसलों की वजह से एक साथ रहते हुए घुटन भी महसूस होती है। परिवार और जीवन से जुड़े छोटे-छोटे फैसलों के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है। फिर चाहे बात कहीं बाहर जाने की हो या फिर कुछ खरीदने की या फिर कोई और मुद्दा या मसला हो।
वहीं एकल परिवार में रहने वाली कविता एकल परिवार के फायदे गिनाती हैं। कहती हैं, एकल परिवार में अपनी आजादी तो है। यहां जो भी फैसले लेने होते हैं, उसे पति-पत्नी ले सकते हैं। कहीं आना-जाना हो या फिर अपनी पसंद के कपड़े पहनने हों, इसके बारे में सबसे पूछना नहीं पड़ता है। इसी तरह सोहबतियाबाग की सुलभा ने कहा, एकल परिवार में आर्थिक व्यवस्था के भी खुद ही मालिक होते हैं, अपनी जिम्मेदारियों का अहसास तो होता है लेकिन अपनी योजनाएं भी उसी मुताबिक बना सकते हैं। ज्यादा पैसा है तो उसका उसकी बंदरबांट नहीं होती है।
‘‘परिवार एक संस्था है जिसमें परिस्थितियों और भावनाओं के आधार पर एक दूसरे के साथ जुड़ाव होता है। बदलती जीवन शैली के बीच आज लोगों की महत्वकांक्षाएं और जरूरतें बढ़ गई हैं, ऐसे में संयुक्त परिवार में सभी के समान अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है, ऐसे में सदस्यों के बीच मतभेद का पनपना स्वाभाविक है,इसीलिए अब एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। वैसे परिवार चाहे संयुक्त हो या एकल, दोनों में ही भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। परिवार के सभी सदस्य दूर हों या पास, दिलों में दूरियां नहीं होनी चाहिए।’’
0 डॉ. इंद्रा श्रीवास्तव
वरिष्ठ समाजशास्त्री
विज्ञापन
संयुक्त परिवार में अगर घर का मुखियाप्रभावी और संकीर्ण मानसिकता का है तो दिक्कतें स्वाभाविक हैं। एक बात और परिवार में जो सदस्य आर्थिक रूप से सबसे ज्यादा सशक्त होता है, उसकी भूमिका और परिवार में उसका महत्व भी अलग होता है। महिलाओं के बीच भी यही स्थिति होती है। वहीं एकल परिवार में घर की सारी जिम्मेदारी खुद उठानी होती हैं यानी जितनी दिक्कतें हैं, उसे साझा करने वाला दूसरा कोई नहीं होता है। ऐसे में अगर पति-पत्नी दोनों कामकाजी हैं तो बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी समस्या होती है।
विज्ञापन
साउथ मलाका के रवींद्र मिश्रा के परिवार में 35 सदस्य हैं। रविंद्र कहते हैं, सुरक्षा, और सुविधा, दोनों ही दृष्टियों से संयुक्त परिवार के अपने फायदे हैं। संयुक्त परिवार में अगर कभी किसी को कोई दिक्कत होती हैं तो सभी सहायता के लिए पूरा परिवार ही जुट जाता है। बच्चों को छोड़कर ऑफिस या कहीं बाहर जाना है तो भी निश्चिंतता के साथ जा सकते हैं। यहां बच्चों की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं बल्कि पूरे परिवार की होती है। बच्चे परिवार के संस्कार भी सीखते हैं।
विज्ञापन
वहीं करेलाबाग कॉलोनी में संयुक्त परिवार में रहने वाली और तीन बहुओं में सबसे छोटी मीनू जायसवाल कहती हैं, संयुक्त परिवार तभी तक अच्छा है जब परिवार के लोग अच्छे हों और सबकी जिम्मेदारियां तय हों। एक साथ रहते हुए भी महिलाओं को अपने हिस्से की आजादी मिले। कई बार सामूहिक फैसलों की वजह से एक साथ रहते हुए घुटन भी महसूस होती है। परिवार और जीवन से जुड़े छोटे-छोटे फैसलों के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता है। फिर चाहे बात कहीं बाहर जाने की हो या फिर कुछ खरीदने की या फिर कोई और मुद्दा या मसला हो।
वहीं एकल परिवार में रहने वाली कविता एकल परिवार के फायदे गिनाती हैं। कहती हैं, एकल परिवार में अपनी आजादी तो है। यहां जो भी फैसले लेने होते हैं, उसे पति-पत्नी ले सकते हैं। कहीं आना-जाना हो या फिर अपनी पसंद के कपड़े पहनने हों, इसके बारे में सबसे पूछना नहीं पड़ता है। इसी तरह सोहबतियाबाग की सुलभा ने कहा, एकल परिवार में आर्थिक व्यवस्था के भी खुद ही मालिक होते हैं, अपनी जिम्मेदारियों का अहसास तो होता है लेकिन अपनी योजनाएं भी उसी मुताबिक बना सकते हैं। ज्यादा पैसा है तो उसका उसकी बंदरबांट नहीं होती है।
‘‘परिवार एक संस्था है जिसमें परिस्थितियों और भावनाओं के आधार पर एक दूसरे के साथ जुड़ाव होता है। बदलती जीवन शैली के बीच आज लोगों की महत्वकांक्षाएं और जरूरतें बढ़ गई हैं, ऐसे में संयुक्त परिवार में सभी के समान अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराना संभव नहीं है, ऐसे में सदस्यों के बीच मतभेद का पनपना स्वाभाविक है,इसीलिए अब एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है। वैसे परिवार चाहे संयुक्त हो या एकल, दोनों में ही भावनात्मक जुड़ाव जरूरी है। परिवार के सभी सदस्य दूर हों या पास, दिलों में दूरियां नहीं होनी चाहिए।’’
0 डॉ. इंद्रा श्रीवास्तव
वरिष्ठ समाजशास्त्री