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कई मरीजों को नहीं मिली छुट्टी

Thu, 10 Nov 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 10 Nov 2016 01:10 AM IST
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Many patients could not leave
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों पर लगी पाबंदी का असर सरकारी अस्पतालों में तो नहीं नजर आया लेकिन निजी नर्सिंग होम्स, अस्पताल, निजी जांच सेंटरों समेत दवा की दुकानों पर मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां पांच सौ और एक हजार की नोटों को लेने से परहेज किया जाता रहा। कॉल्विन अस्पताल में कैश वापस करने को लेकर हंगामा भी हुआ। अन्य दिनों के मुकाबले निजी अस्पतालों में मरीजाें की संख्या में भी पचास फीसदी की रही कमी।
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बुधवार को सबसे अधिक परेशानी उन मरीजों को हुई, जिन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। तीमारदारों के पास ज्यादातर एक हजार और पांच सौ रुपये के नोट थे लेकिन अस्पतालों ने इसे लेने से मना कर दिया। इस कारण मरीजों को छुट्टी नहीं मिली। बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी में भी नहीं दिखा पाए। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा ने कहा कि सरकार ने निजी अस्पतालों को कोई छूट दी नहीं थी। इसके चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि कुछ मरीजों की परेशानियों को देखते हुए पांच सौ और एक हजार के नोट भी जमा किए गए। यही हाल प्राईवेट पैथालॉजी, अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर देखने को मिला। सिविल लाइंस और जार्जटाउन स्थित जांच सेंटर पर दर्जनों की संख्या मरीज बिना जांच कराए ही लौट गए। सिविल लाइंस स्थित सेंटर पर सिटी स्कैन कराने पहुंचे मेजा के राकेश कुमार ने कहा कि उनके पास पांच सौ के नोट थे मगर सेंटर पर इसे लेने से इंकार कर दिया गया। इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व जनसंपर्क प्रवक्ता डॉ. युगांतर पांडेय ने बताया कि नोटों पर पाबंदी का असर ओपीडी पर भी पड़ा है। अन्य दिनों के मुकाबले 50 फीसदी मरीज कम आए।  
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उधर, स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय, बेली, कॉल्विन, चिल्ड्रेन, डफरिन समेत शहर के तमाम सरकारी अस्पतालों में पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट जमा हुए। आसपास स्थित निजी दवा की कई दुकानों पर नोटों को लेने में दुकानदार कन्नी काटते रहे। ड्रग्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल द्विवेदी ने कहा कि पांच सौ और एक हजार की नोटों पर पाबंदी का पूरा असर रहा। इसके चलते मरीजों को परेशानी हुई है। कुछ मरीजों की मजबूरी को देखते हुए नोट लेकर दवाएं दी गईं। 
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कॉल्विन अस्पताल में बुधवार को कैश वापसी को लेकर जमकर हंगामा हुआ। एक तीमारदार ने जांच शुल्क जमा करने के लिए काउंटर पर बैठी महिला कर्मचारी को एक हजार रुपये का नोट पकड़ा दिया। कर्मचारी के पास वापसी के लिए कैश नहीं था। उसने एक हजार रुपये का नोट लौटा दिया और दो सौ रुपये देने को कहा। इस पर तीमारदार भड़क उठा। हंगामा बढ़ने पर सीएमएस समेत तमाम अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। किसी तरह समझाबुझाकर न्होंने मामला शांत करा दिया। 

पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों पर पाबंदी का असर पॉवर कॉरपोरेशन के राजस्व पर भी पड़ा। रोजाना के मुकाबले बुधवार को 10 फीसदी भी कैश नहीं जमा हो सका। बिल काउंटर पर इन दोनों नोटों को लेने से साफ मना कर दिया गया। हजारों उपभोक्ता बिना बिल जमा किए ही लौट गए। मयोहाल विद्युत खंड के अधिशासी अभियंता एके सिंह और कल्याणी देवी विद्युत खंड के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार के मुताबिक अनुसार रोजाना के मुकाबले दस फीसदी भी कैश नहीं जमा हो सका।

नोटों पर पाबंदी को लेकर राजनीतिक पार्टियों के साथ तमाम संगठनों की मिलीजुली प्रतिक्रिया रही। सपा और कांग्रेस ने विरोध जताते हुए इसे तानाशाही भरा रवैया करार दिया। सुभाष चौराहे पर प्रदर्शन करते हुए कांग्रेसी नेता हसीब अहमद और श्रीचंद्र दूबे ने कहा कि इससे आम आदमी को झटका लगा है। सपा अल्पसंख्यक सभा की जार्ज टाउन में हुई सभा में मंडल पर्यवेक्षक साबिर अली और फरहत परवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह फैसला बीजेपी के लिए भारी पड़ेगा। सपा अल्पसंख्यक नेताओं ने प्रधानमंत्री पर कई आरोप भी लगाए। एआईएमआईएम ने भी इसे आपातकाल जैसी स्थिति बताया। 
उधर बीजेपी नेता पार्षद गणेश केसरवानी ने कीडगंज में सभा कर प्रधानमंत्री मोदी के चित्र को मिष्ठान खिलाकर खुशी जताई। कहा कि यह एतिहासिक कदम है। इसी तरह भाजपा विधि प्रकोष्ठ, जैक सेवा ट्रस्ट, उत्तर प्रदेश टैक्स बार एसोसिएशन, समाज सेवी सरदार पतविंदर सिंह आदि ने प्रधानमंत्री के फैसले को सही कदम बताया। 


असर शहर के सिनेमाहालों पर भी पड़ा। यहां सन्नाटा नजर आया। दिन के शो में सामान्य दिनों के मुकाबले दर्शकों की संख्या पचास फीसदी से भी कम रही। जबकि रात के शो खाली ही गए। सिनेमा हालों में जो लोग पांच सौ या हजार के नोट लेकर पहुंचे थे, उन्हें लौटा दिया गया। सिविल लाइंस के रहने वाले तेज प्रताप, कटरा के भानू प्रताप समेत कई ने बताया कि वह पांच सौ की नोट लेकर पीवीआर गए थे लेकिन उन्हें लौटा दिया गया। उधर, पीवीआर के मैनेजर पल्लव हजारिका, स्टार वर्ल्ड के मैनेजर आशुतोष और राजकरन के अकील खान ने बताया कि नोटों पर पाबंदी लगने से बुधवार को दर्शकों की संख्या करीब आधी रही। 
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