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Prayagraj News: द्वापर युग में महर्षि दुर्वासा ने की थी शिवलिंग की स्थापना

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:09 AM IST
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Maharshi Durvasa installed the Shivling during the Dwapara Yuga
फोटो हनुमानगंज 1.महर्षि दुर्वासा आश्रम पर गुप्तकालीन शैली में बना शिव मंदिर2. मुख्य पुजारी धर - फोटो : अमर उजाला
शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर हनुमानगंज के ककरा गांव में दुर्वासा आश्रम स्थित पौराणिक शिव मंदिर में सावन माह में भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। ऋषि दुर्वासा की ओर से स्थापित शिवलिंग एवं गुप्तकालीन निर्मित मंदिर का अपना पौराणिक महत्व है।
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आश्रम में शिवलिंग की स्थापना स्वयं महर्षि दुर्वासा ने की थी। दुर्वासा आश्रम में भगवान भोलेनाथ एवं महर्षि दुर्वासा के दर्शन पूजन के लिए साल भर श्रद्धालु आते रहते हैं। चारधाम की यात्रा करने वाले प्रयाग के बाद यहां पर दर्शन पूजन कर आगे की यात्रा शुरू करते हैं।
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नागपंचमी से रक्षाबंधन पर्व तक आश्रम परिसर में विशाल मेला लगता है। चार दशक पूर्व प्रयाग पीठाधीश्वर गोलोकवासी रंग रामानुजाचार्य महाराज ने आश्रम परिसर में संस्कृत विद्यालय की स्थापना की थी। जहां दूर-दूर से आए बटुक शिक्षा ग्रहण करते हैं।
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महर्षि दुर्वासा आश्रम के विषय में एक कथा प्रचलित है कि द्वापर युग में कलयुग आगमन के पूर्व जब माता अनुसुइया एवं महर्षि अत्री के पुत्र रुद्रावतार ऋषिराज दुर्वासा ने द्वारिकापुरी में भगवान श्री कृष्ण को श्राप दिया, तो उन्हें बहुत ग्लानि हुई। वह घूमते फिरते पिता के आश्रम चित्रकूट पहुंचे और माता-पिता के दर्शन करने के बाद प्रयाग आए। फिर संगम स्नान के बाद अपने गुरु महर्षि भरद्वाज के पास पहुंचे।
यहां गुरुजी को अपनी व्यथा बताई तो महर्षि भरद्वाज ने पूर्व की दिशा में जाकर भगवान भोले नाथ की तपस्या करने को कहा। गुरु के आदेश पर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर महर्षि दुर्वासा पूर्व की ओर चल दिए। चलते-चलते ऋषि दुर्वासा शाम होने पर मां गंगा के पावन तट पर ककराह (वर्तमान में ककरा) नामक स्थान पर रुक गए।
रात्रि में भगवान शंकर ने उन्हें स्वप्न में दर्शन दिया और वहीं रुक कर तपस्या करने का निर्देश दिया। तभी महर्षि ने वहीं पर शिष्यों के सहयोग से आश्रम का निर्माण किया और शिवलिंग की स्थापना की। बाद में स्थानीय निवासियों की ओर से गुप्तकालीन शैली में मंदिर का निर्माण कराया गया। दुर्वासा आश्रम प्रयाग क्षेत्र के पर्यटन स्थल के अंतर्गत है। पर्यटन विभाग की ओर से आश्रम परिसर में लाखों की लागत से सौंदर्यीकरण एवं पार्क का निर्माण किया गया है। संवाद

विदेशी आक्रांताओं ने मूर्तियां खंडित कर दी थीं
मंदिर के मुख्य पुजारी ग्राम प्रधान धर्मेंद्र गिरि (राजा) ने बताया कि कालांतर में विदेशी आक्रांताओं की ओर से मंदिर में स्थापित मूर्तियां खंडित कर दी गई और पूजा पाठ बंद हो गया था। वर्षों बाद पुनः मंदिर का जीर्णोद्धार कर मूर्तियां स्थापित की गईं। खंडित मूर्तियां आज भी मंदिर परिसर में रखी हैं। आश्रम परिसर में ही स्वामी जी द्वारा यज्ञशाला का भी निर्माण कराया गया है, जिसमें स्थानीय कलाकार राम सुंदर दास ब्रह्मा की ओर से रचित बिना पाई मात्रा की चौपाइयां एवं दोहे और भगवान सूर्यदेव की छाया से समय बताने वाली सूर्य घड़ी लोगों के आकर्षण का केंद्र है।
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