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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: Three people got life by giving CPR at the right time in the fair.

Mahakumbh :  मेले में सही समय पर सीपीआर देने से तीन लोगों को मिला जीवनदान

Fri, 17 Jan 2025 09:48 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Jan 2025 09:48 PM IST
सार

अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए, तो उस मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया जाना, उसे कैसे नया जीवन देता है, इसका ताजा उदाहरण मेला क्षेत्र में प्रस्तुत किया गया है।

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Mahakumbh: Three people got life by giving CPR at the right time in the fair.
सीपीआर के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

विस्तार

अगर किसी को कार्डियक अरेस्ट हो जाए, तो उस मरीज को कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) दिया जाना, उसे कैसे नया जीवन देता है, इसका ताजा उदाहरण मेला क्षेत्र में प्रस्तुत किया गया है। यहां पर अब तक तीन लोगों को समय रहते सीपीआर देकर उन्हें पुर्नजीवन दिया गया है। जिसमें आह्वान अखाड़े के महंत अजय गिरी, महंत ननकू गिरी व एक अन्य महिला शामिल है। इन तीनों को अगर समय पर सीपीआर न दिया जाता, तो इनका बच पाना मुश्किल होता।
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इनमें सबसे पहले नाम आता है, आह्वान अखाड़े के महंत अजय गिरी का, जो मकर संक्रांति के पर्व पर अमृत स्नान के लिए निकाली जा रही शोभा यात्रा में रथ पर बैठे थे। थोड़ी ही देर बाद वह अचानक से अचेत हो गए। इस दौरान किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था, कि वह क्या करें, तभी वहां से होकर गुजर रहे केंद्रीय अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में तैनात लैब टेक्नीशियन अजय शुक्ला ने तुरंत महंत अजय गिरी को रथ पर ही सीपीआर देना शुरू कर दिया।
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वहीं सात से आठ मिनट तक सीपीआर देने के बाद महंत अजय गिरी में चेतना आ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत एंबुलेंस से केंद्रीय अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। वहीं दूसरा मामला केंद्रीय चिकित्सालय का है, जहां बृहस्पतिवार की शाम 66 वर्षीय महिला संध्या देवी को अचेत अवस्था में लाया गया था। इस दौरान उनकी उनका शुगर लेवल बहुत कम पाया गया। इसके अलावा ऑक्सीजन लेवल भी 43 हो गया था। ऐसे में डॉ. आशुतोष यादव और उनकी टीम ने तुरंत सीपीआर देकर महिला की जान बचाई।
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फिलहाल अब उनकी स्थित स्थिर बताई जा रही है। इसके अलावा तीसरा मामला मेला के सेक्टर दो स्थित केंद्रीय चिकित्सालय का है, जहां शुक्रवार को 35 वर्षीय महंत ननकू गिरी को आईसीयू वार्ड की देखभाल कर रहे डॉ. सिद्धार्थ पांडेय ने सीपीआर देकर उनकी जान बचाई। जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तो उनकी पल्स और हार्ट बीट का कुछ पता नहीं चल रहा था। जिसके बाद उन्हें करीब 12 मिनट तक सीपीआर दिया गया। जिसके बाद उनकी जान बच सकी।

सीपीआर कब दिया जाता है

सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) कार्डियक अरेस्ट (जब दिल रक्त पंप नहीं कर सकता) में किसी व्यक्ति की जान बचाने का एक तरीका है, जिसमें दिल को फिर से चालू करने का प्रयास किया जाता है।


सीपीआर की जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है। ऐसे में कार्डियक अरेस्ट के मरीज के दिल की धड़कन को फिर से शुरू किया जा सकता है। जिसके बाद मरीज को तुरंत बेहतर उपचार मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। - डॉ. वैशाली सिंह, आईसीयू इंचार्ज, सेक्टर 24 उपकेंद्रीय चिकित्सालय। 
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