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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: The title of Vishva Guru given to Swami Srila Prabhupada

Mahakumbh : स्वामी श्रील प्रभुपाद को दी गई विश्व गुरु की उपाधि, निरंजनी अखाड़ा परिसर में पट्टाभिषेक

Wed, 12 Feb 2025 06:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 12 Feb 2025 06:07 AM IST
सार

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने पहली बार विश्व गुरु की उपाधि से सम्मानित किया। 

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Mahakumbh: The title of Vishva Guru given to Swami Srila Prabhupada
निरंजनी अखाड़ा परिसर में श्रील प्रभुपाद को विश्व गुरु की उपाधि देते संत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस्कॉन और हरे कृष्णा आंदोलन के संस्थापक श्रीकृष्ण कृपामूर्ति एसी भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद को विश्वगुरु की उपाधि दी गई। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने पहली बार विश्व गुरु की उपाधि से सम्मानित किया। 

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विश्व गुरु पट्टाभिषेक का कार्यक्रम निरंजनी अखाड़ा परिसर में नित्यानंद त्रयोदशी पर हुआ। यह उपाधि श्रील प्रभुपाद को दुनिया भर में अनुयायियों को सनातन धर्म से जोड़ने एवं इस्कॉन के प्रति देश-विदेश में उमड़ी श्रद्धा को देखते हुए दी गई।
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निरंजनी पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी, आवाहन अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर अवधूत अरुण गिरि, अखाड़ों के महामंडलेश्वर और भक्तों की उपस्थिति में पट्टाभिषेक हुआ। हरे कृष्ण मूवमेंट और इस्कॉन बंगलूरू के अध्यक्ष मधु पंडित दास और वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास के सानिध्य में यह सम्मान प्रदान किया गया। 
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निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि ने कहा कि यह उपाधि 1968 के कुछ दिनों बाद ही उन्हें मिल जानी चाहिए थी, लेकिन आज इस त्रिवेणी के पावन तट पर हम सभी को यह शुभ कार्य करने का श्रेय मिलना था।  

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा कि श्रील प्रभुपाद महाराज के लिए यह विश्व गुरु की यह पदवी, सूर्य को दीया दिखाने के बराबर है। आवाहन पीठाधीश्वर अरुण गिरि ने कहा कि लोग मुझे अवधूत कहते हैं लेकिन मैं स्वामी श्रील प्रभुपाद महाराज जी को अद्भुत कहता हूं। इस पावन अवसर पर स्वामी प्रभुपाद के अनुयायी दो-दो पौधे लगाने का संकल्प लें, तभी राधा रानी की प्राप्ति होगी। धन्यवाद प्रस्ताव भरतर्षभ दास ने किया। 

गौड़ीय वैष्णव परंपरा के 32वें आचार्य हैं श्रील प्रभुपाद
स्वामी श्रील प्रभुपाद ब्रह्म-मध्व-गौड़ीय वैष्णव परंपरा के 32वें आचार्य थे। उन्होंने 70 वर्ष की आयु में श्री चैतन्य महाप्रभु और वृंदावन के छह गोस्वामी की शिक्षाओं और हरि नाम

संकीर्तन की महिमा को सफलतापूर्वक दुनिया भर में फैलाया और हजारों लोगों ने अपने जीवन को बदलकर सनातन धर्म के दर्शन और संस्कृति को अपनाया।

अखाड़ा परिषद के मधु पंडित दास ने प्रति कृतज्ञता व्यक्त की
वैश्विक हरे कृष्ण आंदोलन के चेयरमैन और संरक्षक, अक्षय पात्र फाउंडेशन के संस्थापक और चेयरमैन मधु पंडित दास ने कहा कि इस्कॉन और हरे कृष्ण आंदोलन के सभी अनुयायियों की ओर से आचार्य श्रील प्रभुपाद को विश्व गुरु से अलंकृत कर सम्मानित करने का निश्चय करने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। 

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