फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: Kumbhnagar will be eco-friendly, 25 thousand artisans will get employment

Mahakumbh : ईको फ्रेंडली होगा कुंभनगर, 25 हजार को मिलेगा रोजगार, 8000 से अधिक संस्थाओं को बसाने का लक्ष्य

Tue, 03 Dec 2024 07:02 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 03 Dec 2024 07:02 PM IST
सार

महाकुंभ में इस बार आठ हजार से अधिक संस्थाओं को बसाने का लक्ष्य हैं। जो पिछले कुंभ की तुलना में डेढ़ गुने से अधिक हैं। इन संस्थाओं में 3800 संस्थाएं ऐसी हैं जो कुंभ में सनातन धर्म के प्रचार के लिए शिविर लगाती रही हैं। इन्होंने बांस से शिविर और प्रवेश द्वार निर्माण को प्राथमिकता दी है।

विज्ञापन
Mahakumbh: Kumbhnagar will be eco-friendly, 25 thousand artisans will get employment
ईको फ्रेंडली शिविर के तहत कार्य करते श्रमिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगम की रेती पर इस बार कुंभनगर पूरी तरह इको फ्रेंडली होगा। बांस-लकड़ी से संतों, महंतों, आचार्यों, महामंडलेश्वरों और शंकराचार्यों के शिविर बनाए जाने लगे हैं। इसकी बसावट से पांच राज्यों के 25 हजार से अधिक कारीगरों को रोजगार मिल रहा है।

विज्ञापन

महाकुंभ में इस बार आठ हजार से अधिक संस्थाओं को बसाने का लक्ष्य हैं। जो पिछले कुंभ की तुलना में डेढ़ गुने से अधिक हैं। इन संस्थाओं में 3800 संस्थाएं ऐसी हैं जो कुंभ में सनातन धर्म के प्रचार के लिए शिविर लगाती रही हैं। इन्होंने बांस से शिविर और प्रवेश द्वार निर्माण को प्राथमिकता दी है।

विज्ञापन


शास्त्री पुल के नीचे शिविर का निर्माण करा रहे देवरहा बाबा न्यास मंच के महंत राम दास का कहना है कि महाकुंभ हो या माघ मेला, त्याग और संयम के साथ रेती पर कल्पवास की परंपरा रही है। बांस के शिविर में अलग ही आनंद मिलता है। इसलिए ईको फ्रेंडली शिविर बनाने को प्राथमिकता दी जा रही है। अखाड़ा क्षेत्र में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी में 32 झोपड़ियां बांस से बनाई जा रही हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

शिविर को तैयार करने के लिए यूपी, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश से 25 हजार से अधिक कारीगर आए हैं। बिहार के पूर्णिया से आए कारीगर शंभू का बताते हैं कि उनके राज्य के चार जिलों से सात हजार से अधिक श्रमिक कॉटेज लगाने का काम कर रहे हैं। शिविर की कुटिया, यज्ञशाला और एकांत साधना कक्ष के निर्माण के लिए बांस और सरपट के शिविरों की मांग अधिक है।

अखाड़ों में कॉटेज बना रहे रजत निषाद कहते हैं कि 15 दिनों के अंदर 32 कुटिया बनानी है। चार हजार हेक्टेयर में बसने वाले मेला क्षेत्र में इस बार 25 सेक्टर बनाए जा रहे हैं। हर सेक्टर में 400 से अधिक संस्थाएं बसाई जा रही हैं। दारागंज, हेतापट्टी, मलवा छतनाग, झूंसी में शिविरों का निर्माण करने के लिए कारीगरों की डिमांड ज्यादा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed