फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: Doctors, engineers and professors of Niranjani Akhara also participated, 70 percent of the monks ha

महाकुंभ : निरंजनी अखाड़े के डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर भी नागा, 70 फीसदी संन्यासी उच्च डिग्रीधारी

Sat, 30 Nov 2024 12:01 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 30 Nov 2024 12:01 PM IST
सार

निरंजनी अखाड़े में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधु हैं। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर शामिल हैं। वृंदावन के आश्रम में रहने वाले निरंजनी अखाड़े के आदित्यानंद गिरि एमबीबीएस डिग्रीधारी हैं, जबकि इस अखाड़े के सचिव ओंकार गिरि इंजीनियर हैं। उन्होंने एमटेक किया है।

विज्ञापन
Mahakumbh: Doctors, engineers and professors of Niranjani Akhara also participated, 70 percent of the monks ha
निरंजनी अखाड़ा के साधु। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी के रूप में प्रवाहमान पंचायती अखाड़ा निरंजनी सनातन संस्कृति की पताका के रूप में फहराता रहा है। यह पहला अखाड़ा है जिसमें डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर भी नागा की दीक्षा लेकर जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। जूना अखाड़े के बाद सबसे ताकतवर माने जाने वाले इस अखाड़े की स्थापना 860 में हुई थी।

विज्ञापन

इस अखाड़े का पूरा नाम श्री पंचायती तपोनिधि निरंजन अखाड़ा है। इसका मुख्यालय मायापुर हरिद्वार में स्थित है। अगर साधुओं की संख्या की बात की जाए तो निरंजनी अखाड़ा देश के सबसे बड़े और प्रमुख अखाड़ों में है। जूना अखाड़े के बाद इसे सबसे ताकतवर अखाड़ा माना जाता है। यह देश के 13 प्रमुख अखाड़ों में एक है।

विज्ञापन


इस अखाड़े में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधु हैं। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर शामिल हैं। वृंदावन के आश्रम में रहने वाले निरंजनी अखाड़े के आदित्यानंद गिरि एमबीबीएस डिग्रीधारी हैं। जबकि इस अखाड़े के सचिव ओंकार गिरि इंजीनियर हैं। उन्होंने एमटेक किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

इसी तरह महंत रामरत्न गिरि दिल्ली स्थित डीडीए में सहायक अभियंता के पद पर काम कर चुके हैं। डॉ. राजेश पुरी ने पीएचडी की उपाधि हासिल की है तो महंत रामानंद पुरी अधिवक्ता है। निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी बताते हैं कि शैव परंपरा के इस अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु-संतों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है।

इस अखाड़े में संन्यास की दीक्षा योग्यता के आधार पर ही प्रदान की जाती है। इसमें संस्कृत के विद्वान और आचार्य भी हैं। निरंजनी अखाड़े की हमेशा एक अलग छवि रही है। सचिव ओंकार गिरि बताते हैं कि इस अखाड़े का गठन सनातन धर्म की रक्षा के लिए किया गया था।

सनातन धर्म के प्रचार के लिए अखाड़े की तरफ से वेद विद्या स्कूल-कॉलेजों की भी स्थापना भी की गई है। गुजरात के मांडवी जिले में पंचायती अखाड़ा निरंजनी का गठन हुआ। जिस समय निरंजनी अखाड़े की स्थापना की गई, उस समय सनातन धर्म पर हमले हो रहे थे। दूसरे धर्म के लोग अपने धर्म का विस्तार करने के साथ ही सनातन धर्म पर हमले कर रहे थे। पंचायती अखाड़ा निरंजनी में पंच परमेश्वर के महंत सबसे सर्वोच्च होते हैं।

इनके अलावा आठ श्री महंत और आठ उप श्री महंत होते हैं। इनके अलावा चार सचिव होते हैं जो सभी निर्णय लेते हैं। इस अखाड़े में सबसे महत्वपूर्ण पद पंच परमेश्वर का होता है। उनकी मंजूरी से ही फैसले होते हैं। छह साल में लगने वाले कुंभ और अर्ध कुंभ में पदों पर योग्यता के आधार पर चुनाव होता है। इसके बाद चयनित संतों को जिम्मेदारी साैंपी जाती है।

पहले महापुरुष बनकर गुरु की सेवा, फिर नागा की दीक्षा

पंचायती अखाड़ा निरंजनी में शामिल होने के नियम पहले बहुत सख्त थे, लेकिन बदलते समय के साथ कुछ राहत दी गई है। आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद बताते हैं कि इस अखाड़े में अब अपराधी, माफिया पैठ नहीं बना सकते। इसलिए कि संन्यासी का चयन योग्यता और इंटरव्यू के आधार पर होता है। अखाड़े में शामिल होने से पहले पांच साल तक ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है। इसके बाद महापुरुष बनाया जाता है। फिर महापुरुष का कार्य होता है कि अपने गुरु की समर्पण भाव से सेवा करे। इस दौरान महापुरुष गुरु के बर्तन, कपड़े साफ करता है। भोजन बनाने की जिम्मेदारी भी महापुरुष की ही होती है। गुरु सेवा में खरा उतरने वाले को ही नागा की दीक्षा दी जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed