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माघ मेला: आस्था, परंपरा और पर्यावरण की साझा जिम्मेदारी

Thu, 12 Feb 2026 01:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 12 Feb 2026 01:50 PM IST
सार

माघ मेला भारतीय संस्कृति और आस्था का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जहाँ हर वर्ष लाखों श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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Magh Mela: Faith, tradition and shared responsibility for the environment
माघ मेले में पीयर्स की ओर से जूट के बैग का वितरण किया गया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मेला भारतीय संस्कृति और आस्था का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। यह मेला न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि, इतनी बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के साथ पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है।

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प्लास्टिक मुक्त माघ मेला की दिशा में कदम

मेले के दौरान पॉलिथीन और प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसे देखते हुए हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी प्रशासन और सरकार ने प्लास्टिक मुक्त माघ मेला के संकल्प को मजबूती से आगे बढ़ाया है। श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे पॉलिथीन के बजाय पर्यावरण–अनुकूल विकल्प अपनाएं, ताकि संगम और आसपास का क्षेत्र स्वच्छ बना रहे।
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पियर्स की अनोखी और संवेदनशील पहल

इसी दिशा में पियर्स ने एक सराहनीय और व्यावहारिक समाधान के साथ माघ मेले में भागीदारी की है। हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड के इस प्रतिष्ठित ब्रांड ने माघ मेले में स्नान के बाद कपड़े बदलने की सुविधा के लिए विशेष चेंजिंग रूम स्थापित किए हैं।
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इसके साथ ही, चेंजिंग रूम के पास महिलाओं को इको-फ्रेंडली जूट बैग वितरित किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने गीले कपड़े आसानी से और सुरक्षित तरीके से ले जा सकें। यह पहल पॉलिथीन के उपयोग को कम करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम योगदान दे रही है।

Magh Mela: Faith, tradition and shared responsibility for the environment
माघ मेले में पीयर्स की ओर से तैयार किया गया चेंजिंग रूम। - फोटो : अमर उजाला।

आस्था के साथ प्रकृति की सुरक्षा

पियर्स की यह सोच न केवल महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखती है, बल्कि माघ मेले को हरित और स्वच्छ बनाने की सरकारी पहल के साथ भी पूरी तरह मेल खाती है। जूट बैग जैसे प्राकृतिक विकल्प अपनाकर यह संदेश दिया जा रहा है कि आस्था के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

माघ मेले में पियर्स की यह पहल एक उदाहरण है कि किस तरह ब्रांड सामाजिक और पर्यावरणीय सरोकारों को समझते हुए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं, जहां श्रद्धा, सुविधा और प्रकृति तीनों का संतुलन बना रहे।

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