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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Magh Mela: Coarse grains return to the plates of Kalpvasis, a support for both health and spiritual practice

Magh Mela : कल्पवासियों की थाली में लौटा मोटा अनाज, सेहत और साधना दोनों का सहारा

Sat, 17 Jan 2026 12:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 Jan 2026 12:50 PM IST
सार

माघ मेला भारतीय जीवनशैली की उस परंपरा का जीता जागता उदाहरण है, जहां संयम, साधना और सात्विक आहार को जीवन का आधार माना गया है। संगम तट पर कल्पवास कर रहे हजारों श्रद्धालु की थाली में एक बार फिर बाजरा, मक्का और चना जैसे मोटे अनाज दिखाई देने लगे हैं।

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Magh Mela: Coarse grains return to the plates of Kalpvasis, a support for both health and spiritual practice
मोटा अनाज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मेला भारतीय जीवनशैली की उस परंपरा का जीता जागता उदाहरण है, जहां संयम, साधना और सात्विक आहार को जीवन का आधार माना गया है। संगम तट पर कल्पवास कर रहे हजारों श्रद्धालु की थाली में एक बार फिर बाजरा, मक्का और चना जैसे मोटे अनाज दिखाई देने लगे हैं, जिन्हें वे सेहत, शुद्धता और साधना का सहारा मानते हैं।

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कल्पवासियों का मानना है कि मोटा अनाज शरीर को हल्का रखता है, पाचन को दुरुस्त करता है और लंबे समय तक ऊर्जा देता है, जिससे तप, व्रत और नियमों का पालन आसानी से हो जाता है। मिर्जापुर के श्रीप्रकाश बताते हैं कि बाजरा खाने से पेट साफ रहता है और यह अनाज आंतों में नहीं चिपकता।
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वाराणसी से पहली बार कल्पवास करने आए ओमप्रकाश तिवारी कहते हैं कि बाजरे का आटा खाने से शरीर संतुलित रहता है और शौच की समस्या नहीं होती। कल्पवास का चौथा वर्ष पूरा कर रहीं उर्मिला बताती हैं कि वह सात्विक भोजन लेती हैं और मोटे अनाज का सेवन अधिक करती हैं जिससे दिनभर चुस्ती बनी रहती है।
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झूंसी के स्वामी देवनायकाचार्य रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य आश्रम के संचालक श्याम सुंदर दासाचार्य 40 वर्षों से कल्पवास कर रहे हैं। उनका कहना है कि मोटा अनाज केमिकल मुक्त होता है, इसलिए इससे स्वास्थ्य सही रहता है। कल्पवास में फलाहार, ब्रह्मचर्य और सात्विक भोजन अनिवार्य है। उनके अनुसार सूर्योदय से पहले स्नान, भजन और अल्प भोजन से शरीर और मन दोनों शुद्ध रहते हैं।

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